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आदित्यपुर में पानी के लिए हाहाकार
आदित्यपुर में गर्मी शुरू होते ही पानी के लिए हाहाकार मच जाता है. वर्तमान में आठ परिवारों को मात्र पाइप लाइन जलापूर्ति नसीब हो रही है, बाकी के करीब 50 हजार परिवारों को टैंकर से जलापूर्ति के आसरे जीवन काटनी पड़ रही है. आदित्यपुर में जलापूर्ति योजना 2023 में पूरी होनी थी, लेकिन वन विभाग के एनओसी के झंझट में अब भी आधी कार्य अधूरी पड़ी हुई है. बता दें कि करीब 396 करोड़ रुपये की लागत से आदित्यपुर में वृहत जलापूर्ति योजना को धरातल पर उतारा जाना है, इसका शिलान्यास वर्ष 2018 में ही तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास ने किया था. तब 36 माह में जलापूर्ति योजना को पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था. टेंडर जिंदल पावर को मिला था, कार्य भी धरातल पर उतरा है. इस योजना के तहत करीब 500 किलोमीटर पाइप लाइन बिछानी थी जिसमें करीब 480 किलोमीटर पाइप लाइन बिछ चुकी है. अब केवल वन भूमि पर पाइप लाइन बिछानी बाकी है. इसे भी पढ़ें :चाईबासा">https://lagatar.in/chaibasa-former-mla-putkar-hembram-passed-away-funeral-today/">चाईबासा: पूर्व विधायक पुतकर हेम्ब्रम का निधन, अंतिम संस्कार आज
सामाजिक संगठन का दबाव भी नहीं आ रहा काम
[caption id="attachment_427314" align="aligncenter" width="300"]alt="" width="300" height="200" /> जन कल्याण मोर्चा अध्यक्ष अधिवक्ता ओम प्रकाश.[/caption]
आदित्यपुर में पेयजल संकट को देखते हुए साथ ही कई अन्य मुद्दों को लेकर सामाजिक संस्था जन कल्याण मोर्चा सक्रिय है. जलापूर्ति योजना की लेट लतीफी को लेकर आंदोलनात्मक रणनीति बनाई, धरना प्रदर्शन भी किया लेकिन फिर भी योजना आगे नहीं बढ़ पा रही है. मोर्चा अध्यक्ष अधिवक्ता ओम प्रकाश ने चेतावनी देते हुए कहा कि जन कल्याण मोर्चा इन सारी बातों पर विमर्श कर जनहित में आगे की रणनीति बनाएगी. उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो वे न्यायालय भी जाएंगे और कार्यकारिणी के निर्णय पर जनहित याचिका दायर भी कर सकते हैं. इसे भी पढ़ें :चाईबासा">https://lagatar.in/chaibasa-former-mla-putkar-hembram-passed-away-funeral-today/">चाईबासा
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क्या कहते हैं अधिकारी
आदित्यपुर नगर निगम के नगर प्रबंधक अजय कुमार ने कहा कि जलापूर्ति कार्य प्रगति पर है, केवल वन विभाग के नए अड़चन से काम में देर हो रही है. उन्हें वन भूमि के बदले नीमडीह में साढ़े 11 एकड़ सरकारी जमीन दे दी गई है लेकिन नई शर्त यह रखी गई है कि भूमि को वनों से आच्छादित कर दें. नई अड़चन 1700 पेड़ को काटना और उसकी लकड़ी वन विभाग में जमा करने की है जिसका एनओसी नहीं हो पा रहा है. वन विभाग के शर्त के तहत जुडको जमीन और पौधरोपण कर भी रही है लेकिन जमीन का एनओसी वन विभाग नहीं दे रही है. हमें वन विभाग के केस के सिलसिले में अदालत का चक्कर लगाना पड़ रहा है. इसे भी पढ़ें :दिल्ली">https://lagatar.in/delhi-people-of-manipur-protest-outside-amit-shahs-house-demand-to-meet-home-minister/">दिल्ली: अमित शाह के घर के बाहर मणिपुर के लोगों का प्रदर्शन, गृह मंत्री से मिलने की मांग [wpse_comments_template]
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