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आदित्यपुर : उच्च शिक्षा निदेशक ने तालाब पर बने श्रीनाथ विवि की भूमि की जांच का दिया आदेश

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  • राजस्व निबंधन एवं भूमि सुधार सचिव को मिला आदेश
  • एक वर्ष पूर्व की गई शिकायत पर नहीं हुई थी कार्रवाई
  • इसके बाद आरटीआई कार्यकर्ता ने राज्यपाल को भेजा था खेद पत्र
Adityapur (Sanjeev Mehta)उच्च शिक्षा निदेशक झारखंड ने तालाब की भूमि पर बने श्रीनाथ विश्वविद्यालय की भूमि की जांच का आदेश दिया है. उच्च शिक्षा निदेशक राम निवास यादव ने 20 फरवरी 2024 को जारी आदेश पत्र में राजस्व निबंधन एवं भूमि सुधार सचिव को श्रीनाथ विश्वविद्यालय की भूमि की प्रकृति की जांच कर उसकी कॉपी उपलब्ध कराने का आदेश दिया है. आदेश की प्रति इस मामले के शिकायतकर्ता आरटीआई कार्यकर्ता और आदित्यपुर के प्रबुद्ध नागरिक प्रो. एसके महतो को भी भेजी गई है. बता दें कि एक वर्ष पूर्व ही आरटीआई कार्यकर्ता ने श्रीनाथ विश्वविद्यालय की जमीन को तालाब की भूमि और सीएनटी एक्ट का उल्लंघन कर वहां विश्वविद्यालय स्थापित करने की शिकायत करते हुए माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन बताया था. इसे भी पढ़ें : छत्तीसगढ़">https://lagatar.in/chhattisgarhs-orchestra-artist-gang-raped-in-palamu/">छत्तीसगढ़

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alt="" width="600" height="400" /> इसपर कार्रवाई नहीं होने पर आरटीआई कार्यकर्ता ने राज्यपाल को 3 माह पूर्व एक खेद पत्र भेजा था. उसमें उन्होंने कहा था कि बहुत दुःखी मन से कहना है कि शिकायतकर्ता की शिकायत पर अब तक कार्रवाई नहीं की गई है, जबकि मुख्य सचिव झारखंड, महामहिम राज्यपाल झारखंड के आदेश से उपायुक्त सरायकेला खरसावां एवं उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग झारखंड द्वारा श्रीनाथ विश्वविद्यालय, आदित्यपुर के विरुद्ध ठोस शिकायत की गई थी. इसे भी पढ़ें : शराब">https://lagatar.in/liquor-policy-scam-kejriwal-said-ed-should-give-date-after-march-12-will-appear-through-video-conferencing/">शराब

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इसमें श्रीनाथ विश्वविद्यालय झारखंड का निर्माण सीएनटी एक्ट 1908 की कंडिका 46 का उल्लंघन कर तालाब को भर कर उसकी भूमि पर विश्वविद्यालय स्थापित किया गया है. चूंकि झारखंड में अभी भी सीएनटी अधिनियम लागू है, इसलिए वह भूमि इस जिला और आदित्यपुर थाना के एक झारखंडी "महतो" का होने के कारण दूसरे जिला एवं दूसरे थाना के व्यक्ति (चाहे वह महतो ही क्यों नहीं हो) के हाथों नहीं बेची जा सकती है, लेकिन इस केस में यहां ऐसा हुआ है. इसे भी पढ़ें : रिश्वत">https://lagatar.in/bribery-scandal-supreme-court-will-give-its-verdict-today-in-the-case-of-exemption-to-mlas-and-mps/">रिश्वत

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साथ ही यह भूमि जिसपर श्रीनाथ विश्वविद्यालय का निर्माण हुआ है सीएनटी एक्ट की प्रतिबंधित भूमि के अतिरिक्त तालाब की भूमि को पाटकर भरी हुई भूमि भी है. इसपर माननीय सुप्रीम के निर्णय (civil appeal no 4787/2001..Hinch Lal Tiwary vrs Kamala Devi & others) का खुल्लम खुल्ला उल्लंघन कर इस विश्वविद्यालय का निर्माण हुआ है. जांच प्रतिवेदन से प्रतिवेदन को देखने और पढ़ने से स्वत: स्पष्ट है कि इस भूमि के प्रयोग में दोनों ही अनियमितताएं हुई हैं. इसमें झारखंड सीएनटी एक्ट 1908 की कई धाराओं तथा माननीय सुप्रीम कोर्ट के उक्त निर्णय का घोर उल्लंघन हुआ है. फिर क्यों नहीं महामहिम कार्यालय उक्त जांच प्रतिवेदन पर अब तक कार्रवाई नहीं कर रहा है. यह बहुत ही संशय का मामला प्रतीत हो रहा है. इसे भी पढ़ें : 18728">https://lagatar.in/532-home-guards-mysteriously-missing-in-18728-investigation-started-on-the-instructions-of-dg/">18728

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इस खेद पत्र के बाद ही 20 फरवरी 2024 को उच्च शिक्षा निदेशक ने उक्त विश्वविद्यालय की जमीन की प्रकृति की जांच का आदेश राजस्व निबंधन एवं भूमि सुधार सचिव को दिया है. बता दें कि आदित्यपुर में ऐसे कई अपार्टमेंट और सोसाइटी हैं जो जल स्त्रोत के थे, जिसमें तालाब एवं अन्य जल स्त्रोत के थे, उसे जमीन को भरकर उसे बेचा गया है. वहां आज अपार्टमेंट्स बसा दिए गए हैं, मसलन स्थिति यह है कि यहां के जलस्त्रोत सूख गए हैं, ग्राउंड वाटर लेवल बहुत नीचे जा चुका है. [wpse_comments_template]

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