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आदित्यपुर : उद्यमी हाउसिंग कॉलोनी के जमा पैसे वापस लेने को तैयार नहीं उद्यमी, कोर्ट जाने की कर रहे तैयारी

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Adityapur (Sanjeev Mehta) : आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र में उद्यमियों को उद्यम लगाने और उन्हें प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से तत्कालीन बिहार सरकार ने 1986 में आयडा बोर्ड में प्रस्ताव पारित कराकर 236 एकड़ जमीन पर उद्यमी आवासीय कॉलोनी स्थापित करने का निर्णय लिया था. उस समय प्रत्येक उद्यमी से 300 वर्गमीटर का प्लॉट आवंटन करने के नाम पर वर्ष 1988 में 12,600 के हिसाब से रुपए लिए गए थे. तब उद्यमियों को आवासीय कॉलोनी का नक्शा भी दिखाया गया था. अब जियाडा द्वारा 25 जुलाई 2022 को उद्यमियों को इस बात की जानकारी दी जा रही है कि इस प्रोजेक्ट को 2008 में ही रद्द कर दिया है. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर:">https://lagatar.in/jamshedpur-fraud-of-4-21-crores-by-taking-power-of-attorney-in-baradwari/">जमशेदपुर:

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[caption id="attachment_373092" align="aligncenter" width="560"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/07/adityapur-emc.jpeg"

alt="" width="560" height="373" /> आवासीय कॉलोनी की जगह पर स्थापित ईएमसी[/caption]

पैसे वापस लेने को तैयार नहीं उद्यमी

आवासीय कॉलोनी के लिए प्रस्तावित जमीन पर ही इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर की स्थापना कर दी गई है. लिहाजा इस योजना में शामिल सभी उद्यमी 15 दिनों के भीतर एक आवेदन और जमा रुपये की रसीद जमा कर पैसे वापस ले लें. जियाडा द्वारा जारी पत्र में 9 अगस्त तक आवेदन और रसीद जमा करने को कहा गया है, लेकिन अब तक एक भी उद्यमी हाउसिंग कॉलोनी के लिए जमा पैसे वापस लेने को तैयार नहीं हो रहे हैं. इस मामले को लेकर उधमी कोर्ट जाने की तैयारी में हैं. बता दें कि जियाडा द्वारा आदेश पत्र में 1988 से जमा पैसे को बगैर सूद लौटाने की बात कही गई है जिसका उद्यमियों ने विरोध किया है. इसे भी पढ़ें : किरीबुरु">https://lagatar.in/kiriburu-crpfs-197th-battalion-planted-150-saplings-in-kendriya-vidyalaya/">किरीबुरु

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[caption id="attachment_373093" align="aligncenter" width="560"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/07/adityapur-prem-ranjan.jpeg"

alt="" width="560" height="373" /> जियाडा के क्षेत्रीय निदेशक प्रेम रंजन[/caption]

क्या कहते हैं जियाडा के क्षेत्रीय निदेशक

जियाडा के क्षेत्रीय निदेशक प्रेम रंजन के अनुसार वर्ष 2008 में उद्यमी प्रतिनिधियों की उपस्थिति में जियाडा बोर्ड ने उद्यमी आवासीय कॉलोनी के प्रोजेक्ट को रद्द कर वहां इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर स्थापित करने की योजना को मंजूरी दी गई थी. वर्तमान में 141 उद्यमियों से आवासीय कॉलोनी के लिए लिए गए करीब 44 लाख रुपये जियाडा के खाते में जमा है. इससे पूर्व कुछ उद्यमी स्वेच्छा से करीब 8 लाख रुपए वापस भी ले चुके हैं. इसे भी पढ़ें : चाईबासा:">https://lagatar.in/adityapur-eighth-student-went-missing-for-tuition-bicycle-found-in-abandoned-condition/">चाईबासा:

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एक उद्यमी न्यायालय की शरण में हैं. बोर्ड निर्णय के अनुसार उद्यमियों को अपने पैसे बगैर सूद के वापस लेने होंगे. यह योजना बोर्ड में जब पास हुआ था तब तक 236 एकड़ जमीन वन विभाग की थी. विभाग से एनओसी भी नहीं मिली थी. एनओसी मिलने और बोर्ड में योजना रद्द होने के बाद अब तक 86 एकड़ भूमि में ईएमसी स्थापित हो चुका है साथ ही 33 एकड़ जमीन में ईएमसी का इंफ्रास्ट्रक्चर डवलप हो चुका है. इसे भी पढ़ें : चाईबासा">https://lagatar.in/adityapur-review-of-development-works-done-in-block-20-point-committee-meeting/">चाईबासा

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गुपचुप तरीके से योजना को किया गया रद्द

[caption id="attachment_373094" align="aligncenter" width="539"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/07/adityapur-samir-singh.jpeg"

alt="" width="539" height="359" /> उद्यमी समीर सिंह[/caption] इस प्रोजेक्ट को रद्द करने और जमा पैसे बगैर सूद के लौटाने के सवाल पर लघु उद्योग भारती के महासचिव समीर ने कहा कि यह उद्यमियों के लिए ड्रीम प्रोजेक्ट था. तब औद्योगिक क्षेत्र को बसाने का लिए यह योजना बनी थी. जिसके तहत उद्यमियों ने 12,600 रुपये के साथ 250 रुपये का फार्म खरीदकर पैसा जमा किया था. इसके तहत हमें 300 वर्गमीटर (तकरीबन 1200 वर्गफीट) जमीन मिलना था. इसके लिए 1998 में प्लाट का नक्शा दिखाकर लॉटरी भी हुई थी. अब स्टेक होल्डर की सहमति के बिना व किसी प्रकार की सूचना दिए बगैर गुपचुप तरीके से इस योजना को रद्द कर दिया गया. भूमि का स्वरूप बदलकर अन्य प्रोजेक्ट को ले आया गया है. झारखंड सरकार दूसरे चीजों के लिए जमीन दे रही है लेकिन उद्यमियों के लिए कुछ नहीं कर रही है. इससे उद्यमियों में निराशा का भाव है. [wpse_comments_template]
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