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औद्योगिक घरानों से मिलती थी मदद
[caption id="attachment_640712" align="aligncenter" width="300"]alt="" width="300" height="163" /> आध्यात्मिक और वैदिक संस्कार देते हुए.[/caption] गुरुकुल के आचार्य बताते हैं कि पहले कुछ औद्योगिक घरानों के फंडिंग से गुरुकुल का संचालन होता था मगर धीरे-धीरे अब वे लोग भी हाथ खींचने लगे हैं. नतीजा बच्चों को भरपेट भोजन भी नहीं मिल पा रहा है. फिर भी आचार्य पंडित रत्नाकर शास्त्री साधना में जुटे हैं और यहां अस्त्र- शस्त्र और वेद की तालीम बच्चों को दे रहे हैं. उन्हें शेफाली मल्लिक सहयोग कर रही है. कुछ ऐसे भी बच्चे हैं, जिन्होंने यहां से तालीम लिया मगर अब वे यहीं रहकर भावी पीढ़ी को तालीम दे रहे हैं. इनका मानना है कि भारत आधुनिक विश्व गुरु तभी बन सकता है, जब बच्चों में नैतिक आध्यात्मिक और वैदिक संस्कार विद्यमान होंगे. इसे भी पढ़ें :चांडिल">https://lagatar.in/chandil-after-all-what-was-feared-happened-a-herd-of-elephants-broke-four-houses/">चांडिल
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वेद के साथ अस्त्र शिक्षा मिलती है बच्चों को
गुरुकुल के आचार्य बताते हैं कि यहां न केवल वेद बल्कि अस्त्र चलाने का भी ज्ञान बच्चों को दिया जाता है. यहां शिक्षा ग्रहण करने वाले विद्यार्थियों को पूरी तरह से गुरुकुल परंपरा में ढाला जाता है. इनमें नैसर्गिक संस्कार विकसित किए जाते हैं. उसका जीता जागता प्रमाण यहां शिक्षा ग्रहण करने वाला सूरज आर्या है, जिसने अपने कठोर साधना से द्वापर युग के अर्जुन की याद ताजा कर देते हैं. कलियुग का अर्जुन सूरज आर्या इसी गुरुकुल में तालीम लेकर ऐसा साधक बन बैठा जो न केवल हाथों से बल्कि मुंह और पैर से भी हर मुद्रा में अचूक निशाने लगाने में पारंगत हो चुका है. मगर दुर्भाग्य देखिए इसकी तालीम गुरुकुल केंपस तक ही सीमित होकर रह. गई यदा-कदा रामनवमी अखाड़ों में करतब दिखाकर सुर्खियां बटोरता रहा, मगर सरकार, शासन- प्रशासन का ध्यान इस ओर कभी आकर्षित नहीं हुआ. एकाध बार सरकारी बाबुओं ने यहां का दौरा जरूर किया मगर, कोरा आश्वासन देकर चलते बने. इसे भी पढ़ें :भीषण">https://lagatar.in/scorching-heat-neither-relief-to-patients-nor-attendants-in-hospitals/">भीषणगर्मी : अस्पतालों में न मरीजों को राहत, न अटेंडेंट काे
गुरुकुल को जीवंत रखने के लिए प्रशासन मदद करें
[caption id="attachment_640713" align="aligncenter" width="600"]alt="" width="600" height="400" /> आध्यात्मिक और वैदिक संस्कार ग्रहण करते बच्चे.[/caption] किसी ने सूरज के अंदर छिपी प्रतिभा का आकलन नहीं किया. थक हार कर सूरज यही अपने आचार्य का सहयोग करने में जुट गया. धुनिक भारत को विश्व गुरु बनाने के अभियान में सूरज आज यहां तालीम लेने वाले बच्चों को अस्त्र-शस्त्र और वेद की शिक्षा दे रहा है. हालांकि झारखंड इस मामले में परिपूर्ण है. मगर वे सभी हाईटेक तालीम लेकर देश- दुनिया में नाम रोशन कर रहे हैं. दरअसल सप्त ऋषि गुरुकुल की स्थापना वैसे बच्चों के लिए की गई थी, जो अनाथ हैं. जो महंगी शिक्षा ग्रहण कर पाने में असक्षम है. खासकर नक्सल प्रभावित क्षेत्र के बच्चों में बौद्धिक विकास सृजन करने के उद्देश्य से इस गुरुकुल की स्थापना की गई थी, मगर झारखंड अपने गठन काल से ही अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है. जिसमें सांपड़ा का यह सप्त ऋषि गुरुकुल भी शामिल है. भारत वाकई में अगर आधुनिक विश्व गुरु बनना चाहता है, तो ऐसे गुरुकुल परंपरा को जीवंत रखने के लिए शासन- प्रशासन को आगे आना ही होगा. इसे भी पढ़ें :किरीबुरू">https://lagatar.in/kiriburu-sword-drawn-between-jmm-and-congress-over-monopoly-on-west-singhbhum-parliamentary-seat/">किरीबुरू
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