- जनवरी में ही 16 फीट पहुंचा जलस्तर
- पीएचईडी के अभियंता ने कहा- 6 महीने तक जलापूर्ति का है स्टॉक
- डैम की क्षमता 21 फीट, 7 फीट से ज्यादा भरा हुआ है गाद
- पीआईएल के बाद कोर्ट के आदेश पर 14.76 करोड़ रुपए की लागत से बनी थी गाद हटाने की योजना
: कांग्रेस विधायक सुरेंद्र पंवार सहित अन्य के 20 ठिकानों पर ईडी की रेड इसके बाद कोर्ट के आदेश पर 14.76 करोड़ रुपए की सीतारामपुर डैम का गाद हटाने की योजना बनी थी, लेकिन फिलहाल मामला ठंडे बस्ते में है. पीएचईडी के कनीय अभियंता कहते हैं कि अभी 6 महीने जलापूर्ति का स्टॉक बचा हुआ है. अगर समय पर मानसून आ गया और अच्छी बारिश हो जाती है तो चिंता की कोई बात नहीं किंतु बारिश कम हुई तो जलापूर्ति में कटौती संभव है. इसे भी पढ़ें : किरीबुरु">https://lagatar.in/kiriburu-people-of-moulanagar-happy-with-the-opening-of-banned-syrup-business/">किरीबुरु
: प्रतिबंधित सिरप कारोबार का उद्भेदन से मौलानगर के लोग खुश बता दें कि सीतारामपुर डैम की कुल क्षमता 21 फीट का है. डैम में 7 फ़ीट गाद भरा हुआ है जिसे निकालने के लिए सामाजिक संगठन झारखंड लीगल एंड एडवायजरी डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन के द्वारा हाईकोर्ट में पीआईएल दर्ज कराया गया था. इसके बाद कोर्ट के आदेश पर 14.76 करोड़ रुपए की योजना सीतारामपुर डैम का गाद हटाने की बनी, लेकिन वर्तमान में प्रस्ताव ठंडे बस्ते में है. इसे भी पढ़ें : लापुंग">https://lagatar.in/lapung-young-man-brutally-murdered-in-ghaghari-forest-crushed-with-stone-and-then-both-eyes-gouged-out/">लापुंग
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13000 परिवारों और 1000 उद्योगों को होती है जलापूर्ति
बता दें कि सीतारामपुर डैम से आदित्यपुर के करीब 13 हजार परिवारों और 1000 उद्योगों को पाइप लाइन से जलापूर्ति का लाभ मिलता है. पिछले दिनों डैम के घटते जलस्तर को देखते हुए तत्कालीन नगर निगम के अपर आयुक्त ने डैम और फ़िल्टर प्लांट का निरीक्षण कर डैम के गाद की सफाई का प्रस्ताव पेयजल स्वच्छता विभाग के कार्यपालक अभियंता से मांगा था. बता दें कि डैम के निर्माण के बाद से ही इसकी कभी सफाई नहीं हुई है. 19.2 वर्ग किलोलीटर का यह डैम घटकर 1000 वर्ग किलोलीटर पर आ गया है. डैम की गहराई करीब 7 मीटर गाद से भर गया है. ऐसे में डैम से होनेवाली जलापूर्ति की क्षमता भी 5 मिलियन गैलन से घटकर 3.5 मिलियन गैलन पर आ गया है. इसे भी पढ़ें : चांडिल">https://lagatar.in/chandil-elephant-fell-into-a-well-while-being-chased-into-the-forest-injured/">चांडिल: जंगल में भगाने के दौरान कुआं में गिरा हाथी, घायल इससे पाइप लाइन जलापूर्ति में फ़ोर्स नहीं रहता है. लोगों को भरपूर पानी नहीं मिलता है. पूर्व में मीटर आधारित बिल लिया जाता था जिसे विभाग को फिक्स करना पड़ा है. इन्हीं कारणों से वर्ष 2017 में झारखंड लीगल एडवाइजरी डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन ने जनहित याचिका दायर की थी. तब हाई कोर्ट ने सही समय पर डैम का गाद हटाने का आदेश विभाग को दिया था. विभाग के ईई ने 14 करोड़ 76 लाख 7 हजार 900 रुपए की स्कीम बनाकर प्रस्ताव बनाकर भेजा भी लेकिन वह ठंडे बस्ते में चला गया है. इसे भी पढ़ें : नोवामुंडी">https://lagatar.in/noamundi-will-not-allow-outsiders-to-work-in-guva-sail-mine-geeta-koda/">नोवामुंडी
: बाहरी लोगों को गुवा सेल खदान में नौकरी नहीं करने देंगे : गीता कोड़ा बता दें कि सीतारामपुर डैम का निर्माण 1963 में हुआ था. तब डैम से आसपास सिंचाई और जलापूर्ति करने का उद्देश्य बना था. लेकिन डैम आज जर्जर स्थिति में है. डैम का रखरखाव शून्य है. वर्ष 2018 में डैम का क्षतिग्रस्त स्पिलवे गेट भी जनहित याचिका दायर करने के बाद बनी, जिसका परिणाम है कि आज डैम में पानी का स्टोरेज बढ़ा है अन्यथा हर वर्ष जुलाई अगस्त तक डैम पानी देने की स्थिति में नहीं होता था. इसे भी पढ़ें : एकेडमिक">https://lagatar.in/responsible-people-are-not-conducting-academic-audit/">एकेडमिक
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