टाउन प्लानर नियुक्ति मामला : HC ने JPSC से पूछा, 186 अभ्यर्थियों का सर्टिफिकेट कब का
नामकुम के भुलक्कड़ सीओ विनोद प्रजापति
alt="सीएम के आदेश के 5 माह बाद भी 22 आदिवासी परिवारों के लिए जमीन नहीं खोज पाया प्रशासन" width="600" height="400" /> 2 सितंबर को जिन दो घरों में बुलडोजर चले थे वे डेविड आइंद और सोमा सांगा के थे. दोनों ने बताया कि मूसाटोली के 22 परिवारों को बसाने के लिए सीठियो में 32 एकड़ जमीन दिखाई गई थी. लेकिन वहां हाईटेंशन तार के बीच हमलोग जान जोखिम में डालकर वहां नहीं रह सकते. दूसरी तरफ जंगली इलाका होने के कारण वहां किसी तरह की कोई सुविधा नहीं है. वहां की बंजर जमीन पर खेती भी नहीं हो पाएगी. इसलिए उन्होंने प्रशासन को दूसरी जगह देखने को कहा. इसके बाद उन्होंने 2 बार नामकुम सीओ विनोद प्रजापति को फोन कर पूछा भी कि कहीं और जमीन चिन्हित हुआ है या नहीं. जिसपर उन्होंने बताया कि जमीन की तलाश हो रही है. शुभम संदेश ने जब सीओ से मामले की जानकारी चाही तो उन्होंने कहा कि तीन जगह जमीन देखी गई है. जब यह पूछा गया कि वो तीन जगह कौन से हैं? जवाब में उन्होंने कहा नाम याद नहीं आ रहा है.
आश्वासन की घुट्टी पिलाकर चलते बने नेताजी
alt="सीएम के आदेश के 5 माह बाद भी 22 आदिवासी परिवारों के लिए जमीन नहीं खोज पाया प्रशासन" width="600" height="400" /> मूसाटोली में जिस जगह पर स्मार्ट सिटी के लिए सड़क बनना है, उस जगह 5 आदिवासियों के मकान हैं. इनमें से 2 को 2 सितंबर को तोड़ा गया था. इसके बाद 3 सितंबर को बचे हुए तीन घर तोड़ने थे, लेकिन उससे पहले पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी वहां पहुंच गये और विरोध किया, जिसके बाद बचे हुए घरों को ध्वस्त नहीं किया गया. 4 सितंबर को मामला मुख्यमंत्री के पास पहुंचा. मुख्यमंत्री ने सोमा और डेविड और उनके परिवार के लोगों से मुलाकात की. उन्हें आश्वासन दिया कि जबतक वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की जाती, तबतक वहां बचे हुए मकान नहीं तोड़े जाएंगे. 7 सितंबर को मंत्री मिथिलेश ठाकुर पीड़ित परिवारों के लिए राशन-पानी लेकर मूसाटोली पहुंच गये और भरोसा दिलाया कि उन्हें इससे भी अच्छी जगह बसाया जाएगा. इसके बाद विधायक राजेश कच्छप समेत कई नेता मूसाटोली पहुंचे और आश्वासन की घुट्टी पिलाकर निकल गये. करीब 5 महीना हो चुका है, लेकिन जमीन का कोई अता-पता नहीं है.
निराश होने लगे हैं मूसाटोली के आदिवासी परिवार
उधर अतिक्रमण नहीं हटने के कारण रांची स्मार्ट सिटी की सड़क का काम लटक गया है. मंत्रियों के बंगले लगभग कंप्लीट हो चुके हैं. सभी जगहों पर सड़क का भी काम हो चुका है, बस मूसाटोली में सड़क निर्माण नहीं हो पाया है. जबतक प्रशासन 22 परिवारों के लिए अच्छी जगह ढूंढकर उन्हें नहीं बसाता, तबतक मूसाटोली में सड़क निर्माण भी नहीं हो पाएगा. स्मार्ट सिटी कॉरपोरेशन ने 19 अक्टूबर को आदिवासी परिवारों और जिला प्रशासन के साथ बैठक की थी और जिला प्रशासन को जल्द जमीन ढूंढने को कहा था. लेकिन अबतक कुछ नहीं हुआ. मुख्यमंत्री का आश्वासन, मंत्रियों, विधायकों का घर पहुंचने का सिलसिला, अधिकारियों के साथ मीटिंग यह देखकर मूसाटोली के लोगों को उम्मीद जगी थी कि जल्द उन्हें अच्छी जगह पर मकान उपलब्ध कराया जाएगा, लेकिन अफसरों का यह रवैया देखकर वे अब निराश हो चले हैं. इसे भी पढ़ें - चिराग">https://lagatar.in/33-security-guards-will-be-deployed-under-the-security-of-chirag-paswan-will-get-z-category-security/">चिरागपासवान की सुरक्षा में तैनात होंगे 33 सुरक्षागार्ड, मिलेगी जेड कैटेगरी सुरक्षा [wpse_comments_template]

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