Latehar: जिले में वन पट्टाधारियों के साथ वन विभाग इंसाफ नहीं कर रहा है .जिला प्रशासन एवं वन विभाग के संयुक्त तत्वावधान जिले में निवास कर रहे वनवासियों को वनाधिकार कानून के प्रावधानों के तहत वनपट्टा तो जारी कर दिया गया है, लेकिन वन विभाग इसका अनुपालन नहीं कर रहा है. ऐसा ही मामला जिले के महुआडांड़ अनुमंडल के तंबोली ग्राम में पिछले तीन-चार वर्षो से चल रहा है. तंबोली ग्राम निवासी अनुसूचित जनजाति के प्रमोद कुजू, दुलो कुजूर, कमिल कुजूर, सिल्वेस्टर कुजूर एवं तिरमुलूस कुजूर को पिछले 10 वर्षों से पट्टाधारी होने के बावजूद अपने हक के लिए वन विभाग के साथ जद्दोजहद कर रहे हैं. बताते चलें कि अधिभोग के अधीन वन भूमि के लिए हक का दावा में अनुसूचित जनजाति सदस्यों ने जिला प्रशासन से वना अधिकार कानून के तहत दावा पेश किया था. उनके आवेदनों पर जांच करने के बाद तंबोली ग्राम स्थित खाता संख्या 203/ 74 प्लॉट 916 कुल रकबा एक एकड़ 96 डिसमिल दूलो कुजूर, खाता 203/74 प्लॉट 916/ 3 कुल रकबा एक एकड़ 50 डिसमिल प्रमोद कुजूर के नाम, खाता 17/ 6 प्लॉट 45 कुल रकबा 70 डिसमिल कमिल कुजूर के नाम, खाता 17/ 6 प्लॉट 49/ 2 कुल रकबा 90 डिसमिल सिल्वेस्टर के नाम, खाता 17/6 प्लॉट 49 रकबा 90 डिसमिल तिरुमुलस कुजूर के नाम वर्ष 2010 में लातेहार जिला मुख्यालय में आयोजित पट्टा वितरण शिविर में लातेहार जिला समाहर्ता सह उपायुक्त, वन संरक्षक बफर कोर एरिया व्याघ्र परियोजना पलामू एवं जिला कल्याण पदाधिकारी लातेहार के संयुक्त हस्ताक्षर से पट्टा निर्गत किया गया था. अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वन निवासी नियम 2008 के उप नियम 8 क के तहत भारत सरकार के जनजाति कार्य मंत्रालय के आदेश पर उन्हें पूर्व की जोत कोड वाली भूमि पर मालिकाना हक प्रदान किया गया है. इस भूमि पर वनवासियों ने वर्ष 2015 तक शांतिपूर्वक खेती किया. वर्ष 2016 से वन विभाग द्वारा उन्हें अपनी भूमि से हटाने का लगातार प्रयास किया जाता रहा है. इन पट्टाधािरयों का कहना है कि वन विभाग के गार्ड दर्जनों बार उनकी पिटाई कर चुके हैं . वर्ष 2016 में केस संख्या 316/ 16 एवं वर्ष 2017 में केस संख्या 256/ 17 एवं 257/ 17 दायर कर उन्हें जेल भी भेज चुके हैं, हालांकि इन झूठे मामलों का पर्दाफाश होने के बाद न्यायालय द्वारा उन्हें मुक्त कर दिया गया था, लेकिन इन पट्टाधािरयों में वन विभाग के इस कार्रवाई से भारी आक्रोश व्याप्त है. उनका कहना है कि एक ओर सरकार उन्हें मालिकाना हक का कागज सौंपती है तो दूसरी ओर सरकार का ही दूसरा महकमा उन्हें अपराधियों के जैसा सलूक करता है.उनका कहना है कि उनसे जमीन भी लूटी जा रही है और उन्हें जेल भी भेजा जा रहा है. फिर भी वन प्रशासन एवं जिला प्रशासन मौन है. इसे भी पढ़ें - नीट">https://lagatar.in/neet-paper-leak-cbi-reaches-hazaribaghs-oasis-school-interrogation-of-the-principal-continues/">नीट
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