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15 साल की कानूनी जंग के बाद सूचना अधिकार का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा

संत जोसेफ कॉलेज (खूंटी) ने सुप्रीम कोर्ट में सूचना आयुक्त के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें सूचना मांगने वाले प्रोफेसर को ऑडिट रिपोर्ट, उपयोगिता प्रमाण पत्र आदि देने का आदेश दिया था.
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Ranchi :  संत जोसेफ कॉलेज (खूंटी) ने सुप्रीम कोर्ट में सूचना आयुक्त के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें सूचना मांगने वाले प्रोफेसर को ऑडिट रिपोर्ट, उपयोगिता प्रमाण पत्र आदि देने का आदेश दिया था.

 

कॉलेज ने सूचना अधिकार के तहत सूचना नहीं देने की कानूनी जंग 2016 में शुरू की थी. हाईकोर्ट में चली नौ साल की लंबी लड़ाई में हारने के बाद अब 2026 में कॉलेज सुप्रीम कोर्ट पहुंची है. 

 

संत जोसेफ कॉलेज (खूंटी) के प्रोफेसर अक्ष्य कुमार राय ने सूचना अधिकार अधिनियम 2005 के तहत कॉलेज से चार बिंदुओं पर सूचना मांगी थी. इसमें वित्तीय वर्ष 2011-15 तक की ऑडिट रिपोर्ट, खर्च का उपयोगिता प्रमाण पत्र, इसी अवधि में संत जोसेफ कॉलेज की गवर्निग बॉडी (जीबी) की बैठकों की कार्यवाही और सरकार से मिली अनुदान की राशि व सरकारी शिक्षकों के लिए खर्च नहीं करने के आधार से संबंधित दस्तावेज शामिल थे. 

 

प्रोफेसर कुमार द्वारा मांगी गयी सूचना कॉलेज ने देने से इनकार कर दिया. इस मामले में कॉलेज की दलील यह थी कि वह एक अल्पसंख्यक संस्था है, इसलिए वह सूचना अधिकार के कानून के दायर से बाहर है. साथ ही प्रोफेसर द्वारा मांगी गयी सूचना गोपनीय है और सूचना अधिकार कानून में निर्धारत छूट के दायरे में है.

 

कॉलेज द्वारा सूचना देने से इनकार करने क बाद प्रोफेसर ने कॉलेज के फैसले के खिलाफ सूचना आयोग में अपील की. सूचना आयोग ने सुनवाई के बाद सितंबर 2016 में अपना फैसला सुनाया. आयोग ने कॉलेज को प्रोफेसर द्वारा मांगी गयी सारी सूचनाएं उपलब्ध कराने का आदेश दिया.

 

कॉलेज ने सूचना आयोग के इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी. कॉलेज की ओर से 2016 में हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर सूचना आयोग द्वारा दिये गये फैसले को रद्द करने की मांग की गई.

 

हाईकोर्ट में चली लंबी कानूनी लड़ाई के बाद न्यायाधीश अनिल कुमार चौधरी ने मई 2024 में अपना फैसला सुनाया. हाईकोर्ट ने सूचना आयोग के फैसले को सही करार देते हुए कॉलेज की याचिका खारिज कर दी. इसके बाद कॉलेज ने हाईकोर्ट से इस फैसले के खिलाफ एलपीए दायर किया.

 

कॉलेज के एलपीए पर सुनवाई के बाद न्यायाधीश सुजीत नारायण और न्यायाधीश राजेश कुमार की पीठ ने 2025 में अपना फैसला सुनाया. न्यायालय ने कॉलेज की याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि कॉलेज को सरकार द्वारा दिया जाने वाले अनुदान पर्याप्त है, इसलिए वह सूचना अधिकार कानून के दायरे में शामिल है.

 

हाईकोर्ट से एलपीए खारिज होने के बाद कॉलेज ने सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील दायर की है. सुप्रीम कोर्ट ने अभी कॉलेज की याचिका पर सुनवाई की तिथि निर्धारित नहीं की है.

 

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