Ranchi : रांची सिविल कोर्ट के अधिवक्ताओं में एसटी-एससी थाना प्रभारी द्वारा महिला अधिवक्ताओं के साथ धक्का-मुक्की और अभद्रता करने को लेकर आक्रोश का माहौल है. इस घटना पर रोष जताते हुए अधिवक्ताओं ने आज न्यायिक कार्य से दूर रहने का निर्णय लिया.
बार एसोसिएशन ने रांची सिविल कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश को आज न्यायिक कार्य से अलग रहने की जानकारी दी है और आज के सूचीबद्ध मामलों में किसी भी तरह का विपरीत आदेश पारित न करने का आग्रह किया है.
वकीलों की सुरक्षा को लेकर रांची सिविल कोर्ट बार एसोसिएशन ने एक विशेष बैठक दोपहर 1:30 बुलाई गई है.
किसी स्वतंत्र एजेंसी से घटना की जांच कराने की मांग
रांची जिला बार एसोसिएशन के महासचिव संजय विद्रोही ने कहा है कि इस संपूर्ण घटना की निष्पक्ष जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए. दोषी थाना प्रभारी को हटाया जाए और दोषी पुलिस अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई कर उन्हें निलंबित किया जाए.
उन्होंने अधिवक्ताओं की सुरक्षा को लेकर स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर बनाने की भी मांग की. कहा कि एडवोकेट एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट को अविलंब लागू किया जाना चाहिए.
अधिवक्ता के साथ अभद्र व्यवहार करने का आरोप
बता दें कि गुरुवार को अधिवक्ता सविता कुजूर अपनी सहकर्मी अधिवक्ताओं के साथ एक मुवक्किल की शिकायत दर्ज कराने एससी-एसटी थाने पहुंची थीं. आरोप है कि वहां मौजूद जांच अधिकारी महेंद्र बाड़ा ने पहले शिकायत दर्ज नहीं की.
इसके बाद जब अधिवक्ता सविता कुजूर अपनी कानूनी मांग को लेकर थाना प्रभारी महेश मुंडा से मिली तो उन्होंने सहयोग करने के बजाय उनके साथ अभद्र व्यवहार किया.
रांची SSP से की गई शिकायत में थाना प्रभारी महेश मुंडा ने कथित तौर पर गंदी नीयत से अधिवक्ता सविता कुजूर का हाथ पकड़ा और उन्हें दीवार की ओर धक्का देने की बात कही गई है.
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