Search

 
 
 

क्लस्टर सिस्टम व NEP 2020 के खिलाफ आइसा का मोर्चा, 20 दिन में शिक्षा मंत्री के घेराव की चेतावनी

Ranchi: ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) झारखंड ने राज्य सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा लागू किए जा रहे क्लस्टर सिस्टम और नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया है. शुक्रवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में आइसा नेताओं ने इन नीतियों को छात्र, महिला और गरीब विरोधी बताते हुए सरकार पर शिक्षा के निजीकरण और बाजारीकरण का आरोप लगाया.
 

Ranchi: ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) झारखंड ने राज्य सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा लागू किए जा रहे क्लस्टर सिस्टम और नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया है. शुक्रवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में आइसा नेताओं ने इन नीतियों को छात्र, महिला और गरीब विरोधी बताते हुए सरकार पर शिक्षा के निजीकरण और बाजारीकरण का आरोप लगाया.

 

आइसा ने चेतावनी दी कि यदि 20 दिनों के भीतर सरकार ने क्लस्टर सिस्टम वापस नहीं लिया और उनकी मांगों पर विचार नहीं किया, तो शिक्षा मंत्री सुदीप कुमार सोनू, विधानसभा और राज्यपाल का घेराव किया जाएगा.

 

क्या है क्लस्टर सिस्टम?

 

छात्र संगठन के अनुसार, 29 अप्रैल 2026 को जारी सरकारी संकल्प के तहत राज्य के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को क्लस्टर प्रणाली के तहत पुनर्गठित किया जा रहा है. आइसा का आरोप है कि इस व्यवस्था के लागू होने के बाद कॉलेजों में केवल एक ही संकाय- साइंस, आर्ट्स या कॉमर्स की पढ़ाई कराई जाएगी.

 

आइसा नेताओं ने दावा किया कि डोरंडा कॉलेज को विज्ञान संकाय केंद्रित संस्थान बनाने का निर्देश दिया गया है. इससे वहां पढ़ रहे हजारों आर्ट्स छात्रों के सामने भविष्य का संकट खड़ा हो गया है. संगठन का कहना है कि सरकार सरकारी कॉलेजों में मल्टी-डिसिप्लिनरी शिक्षा खत्म कर छात्रों को महंगे निजी संस्थानों की ओर धकेलना चाहती है.

 

महिला शिक्षा और क्षेत्रीय भाषाओं पर असर का आरोप

 

आइसा के राज्य सचिव त्रिलोकीनाथ समेत अन्य नेताओं ने इस नीति को महिला विरोधी करार दिया. उन्होंने कहा कि संथाल परगना क्षेत्र के कई महिला कॉलेजों में विज्ञान की पढ़ाई बंद की जा रही है, जिससे छात्राओं की शिक्षा प्रभावित होगी.

 

संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय के अंतर्गत कई अंगीभूत कॉलेजों में पीजी की पढ़ाई बंद कर दी गई है. इससे गरीब, आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों, खासकर छात्राओं को 150 से 200 किलोमीटर दूर जाकर पढ़ाई करनी पड़ेगी. इसके अलावा कुड़मी और बांग्ला जैसी क्षेत्रीय भाषाओं को छात्र संख्या कम होने का हवाला देकर धीरे-धीरे समाप्त करने की कोशिश का भी आरोप लगाया गया.

 

शिक्षकों की कमी और निजीकरण पर सवाल

 

आइसा नेताओं ने कहा कि राज्य के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शिक्षकों की भारी कमी है. उनका दावा है कि यूजीसी मानकों के अनुसार जहां हजारों शिक्षकों की आवश्यकता है, वहां वर्तमान में बेहद कम शिक्षक कार्यरत हैं.

 

संगठन ने कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत सेल्फ फाइनेंस और वोकेशनल कोर्स को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे छात्रों पर फीस का बोझ बढ़ेगा और शिक्षा आम लोगों की पहुंच से दूर होती जाएगी. साथ ही  शिक्षकों की नियुक्ति स्थायी के बजाय कॉन्ट्रैक्ट आधारित किए जाने की भी आलोचना की गई.

 

आंदोलन की तैयारी


आइसा ने घोषणा की कि आने वाले दिनों में राज्यभर के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जागरूकता अभियान और हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा. संगठन ने सरकार से क्लस्टर सिस्टम और नई शिक्षा नीति के प्रावधानों पर पुनर्विचार करने की मांग की है. आइसा ने कहा कि यदि सरकार ने फैसला वापस नहीं लिया, तो पूरे राज्य में व्यापक छात्र आंदोलन चलाया जाएगा.

Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें.

Comments
Leave a Comment
Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही