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आलम हॉस्पिटल प्रबंधन ने ठगी के आरोपों पर रखा पक्ष, कहा-कंजर्वेटिव ट्रीटमेंट आयुष्मान योजना से कवर नहीं होता

Ranchi :  अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि आयुष्मान भारत योजना के तहत कंजर्वेटिव ट्रीटमेंट संबंधित उपचार पैकेज में शामिल नहीं है. इसी वजह से इसके इलाज का बिल आयुष्मान कार्ड के माध्यम से कवर नहीं किया जा सकता.
 
आलम हॉस्पिटल

Ranchi :  बरियातू स्थित आलम हॉस्पिटल प्रबंधन ने मरीज के परिजन द्वारा लगाए गए ठगी के आरोपों पर अपना पक्ष रखा है. परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर आयुष्मान कार्ड से इलाज की सुविधा उपलब्ध होने की बात कहकर मरीज भर्ती करने और बाद में इलाज से इनकार करने का आरोप लगाया है.

 

प्रबंधन ने आरोपों पर सफाई देते हुए कहा है कि मरीज के परिजनों को आयुष्मान कार्ड के तहत इलाज की शर्तों के बारे में पहले ही जानकारी दे दी गई थी. अस्पताल का दावा है कि परिजनों को स्पष्ट रूप से बताया गया था कि यदि मरीज को ऑपरेशन की जरूरत पड़ी तो आयुष्मान कार्ड से इलाज किया जाएगा. 

 

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आलम हॉस्पिटल प्रबंधन के अनुसार, परिजनों को यह भी बताया गया था कि यदि मरीज का इलाज बिना ऑपरेशन के किया जाता है, तो उस उपचार का खर्च परिजनों को स्वयं वहन करना होगा. प्रबंधन का कहना है कि मरीज की नाजुक स्थिति को देखते हुए ऑपरेशन के बजाय उन्हें कंजर्वेटिव ट्रीटमेंट दिया गया.

 

अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि आयुष्मान भारत योजना के तहत कंजर्वेटिव ट्रीटमेंट संबंधित उपचार पैकेज में शामिल नहीं है. इसी वजह से इसके इलाज का बिल आयुष्मान कार्ड के माध्यम से कवर नहीं किया जा सकता. 

 

गौरतलब है कि बोकारो जिले के निवासी जावेद अंसारी ने अस्पताल प्रबंधन पर आयुष्मान कार्ड से इलाज की सुविधा उपलब्ध होने की बात कहकर अपनी मां को भर्ती करने और बाद में इलाज से इनकार करने का आरोप लगाया है.

 

जावेद अंसारी के मुताबिक, ह अपनी मां शरीफून खातून का इलाज कराने के लिए आलम हॉस्पिटल पहुंचे थे. अस्पताल में भर्ती कराने से पहले उन्होंने प्रबंधन से आयुष्मान कार्ड के जरिए इलाज की सुविधा के बारे में जानकारी ली थी.  उनका आरोप है कि कार्ड से इलाज होने की बात पर भरोसा करने के बाद ही उन्होंने अपनी मां को अस्पताल में भर्ती कराया. 

 

परिजन का आरोप है कि मरीज को भर्ती करने के बाद ऑपरेशन के लिए परिजनों से 1 लाख 20 हजार रुपये की मांग की गई.  जब उन्होंने आयुष्मान कार्ड के माध्यम से इलाज करने की बात कही, तो अस्पताल प्रबंधन ने इस सुविधा के तहत इलाज करने से इनकार कर दिया.

 

जावेद अंसारी का कहना था कि आर्थिक स्थिति कमजोर होने और आवश्यक राशि की व्यवस्था नहीं हो पाने के कारण उनकी मां का ऑपरेशन नहीं हो सका. इसके बाद मरीज को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया.

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