Ranchi: अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की राष्ट्रीय सचिव एवं पूर्व विधायक अम्बा प्रसाद ने इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है. फेसबुक लाइव के माध्यम से आम जनमानस को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि इस युद्ध का असर भारत की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जिंदगी पर पड़ सकता है.
आवश्यक वस्तुओं के बढ़ सकते दाम
अम्बा प्रसाद ने कहा कि भारत में आने वाले कच्चे तेल का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा ईरान से आता है. वर्तमान युद्ध की स्थिति के कारण कच्चे तेल के आयात में कमी की संभावना है, जिससे रसोई गैस, सीएनजी और रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं के दाम बढ़ सकते हैं. उन्होंने ईरान द्वारा तेल आपूर्ति रोकने की दी गई धमकी पर भी चिंता जताई.
सामने नहीं आ रही स्पष्ट नीति
उन्होंने प्रधानमंत्री की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री कई देशों का दौरा कर वैश्विक संबंध मजबूत करने की बात करते हैं, लेकिन आज जब भारत को खुलेआम तेल न देने की धमकी दी जा रही है, तब केंद्र सरकार की स्पष्ट नीति सामने नहीं आ रही है. उन्होंने कहा कि देश में फिलहाल लगभग 40 दिनों से भी कम का तेल भंडार मौजूद है, जो चिंताजनक स्थिति है.
लोकसभा में चर्चा नहीं होना देशवासियों से धोखा
अम्बा प्रसाद ने कहा कि इस समय लोकसभा का सत्र चल रहा है, लेकिन इतने गंभीर अंतरराष्ट्रीय हालात के बावजूद इस मुद्दे पर चर्चा नहीं कराई जा रही है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने बढ़ती महंगाई और युद्ध की स्थिति को देखते हुए लोकसभा में इस विषय पर चर्चा की मांग की थी, लेकिन भाजपा ने इसे खारिज कर दिया.
केंद्र सरकार केवल बयानबाजी में व्यस्त
उन्होंने आरोप लगाया कि युद्ध के कारण महंगाई लगातार बढ़ रही है, जिसका ताजा उदाहरण रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी है. इसके बावजूद केंद्र सरकार इस मुद्दे से बचती नजर आ रही है. उन्होंने कहा कि शेयर बाजार में गिरावट, सोना-चांदी की कीमतों में तेजी और वैश्विक तनाव के बावजूद सरकार आवश्यक तैयारी करने के बजाय केवल बयानबाजी में व्यस्त है.
आम जनता के हितों की रक्षा हो: अम्बा प्रसाद
अम्बा प्रसाद ने केंद्र सरकार से मांग की कि इस गंभीर स्थिति को हल्के में न लेते हुए आवश्यक कदम उठाए जाएं, ताकि आम जनता को किसी प्रकार की आर्थिक या सामाजिक परेशानी का सामना न करना पड़े. उन्होंने संसद के मौजूदा सत्र में सर्वदलीय बैठक बुलाने और स्पष्ट नीति निर्धारण की भी मांग की. जिससे वैश्विक तनाव के बीच देश और आम जनता के हितों की रक्षा की जा सके तथा विश्व में शांति की स्थापना हो सके.
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