Ranchi: सरला बिरला विश्वविद्यालय में ‘एआई एंड एमएल फॉर एजुकेटर्स’ विषय पर आयोजित फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का शुभारंभ हुआ. इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में आदित्य बिरला ग्रुप (कॉरपोरेट अफेयर्स) के अध्यक्ष डॉ. विनोद के. शर्मा ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मानव क्षमताओं को बढ़ाने का कार्य करता है, न कि मानव रोजगार को समाप्त करने का.
उन्होंने कहा कि समय के साथ हमें स्वयं को अपडेट रखना होगा, ताकि बदलती तकनीक के साथ कदमताल किया जा सके. उन्होंने यह भी कहा कि आज के युवा कई मायनों में पिछली पीढ़ियों से अलग हैं, इसलिए परिवर्तन को अपनाना समय की मांग है.
यह कार्यक्रम झारखंड स्टेट हायर एजुकेशन काउंसिल के सहयोग से झारखंड स्टेट फैकल्टी डेवलपमेंट एकेडमी और डिपार्टमेंट ऑफ हायर एंड टेक्निकल एजुकेशन के तत्वावधान में आयोजित किया गया. कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में डिपार्टमेंट ऑफ हायर एंड टेक्निकल एजुकेशन की उपनिदेशक डॉ. विभा पांडेय ने कहा कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों की क्षमता का विकास करना है. उन्होंने बताया कि राज्य और केंद्र सरकार एआई और एमएल के क्षेत्र में प्रशिक्षण कार्यक्रमों और शोध गतिविधियों को प्रोत्साहित कर रही है.
विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रो. एस.बी. दांडिन ने कहा कि एआई और मशीन लर्निंग जैसे अत्याधुनिक विषयों पर आयोजित यह कार्यक्रम शिक्षकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है. उन्होंने झारखंड स्टेट हायर एजुकेशन काउंसिल के सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आगामी पांच दिनों में प्रतिभागियों को इन उभरती तकनीकों के बारे में उपयोगी जानकारी प्राप्त होगी.
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सी. जगनाथन ने अपने संबोधन में कहा कि सरला बिरला विश्वविद्यालय में इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन होना गर्व की बात है. उन्होंने कहा कि आज के समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग हमारे दैनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं और यह कार्यक्रम शिक्षकों को आधुनिक तकनीकी ज्ञान से समृद्ध कर शिक्षण की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में सहायक होगा.
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का जनक जॉन मैकार्थी
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के महानिदेशक प्रो. गोपाल पाठक ने कहा कि एआई और मशीन लर्निंग भविष्य की महत्वपूर्ण तकनीकें हैं. उन्होंने बताया कि एआई की आधारशिला जॉन मैकार्थी द्वारा रखी गई थी, जिन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का जनक माना जाता है. उन्होंने बताया कि एआई और मशीन लर्निंग के लिए डेटा अत्यंत महत्वपूर्ण है और इन तकनीकों के माध्यम से स्वास्थ्य, कृषि और समाज से जुड़ी कई जटिल समस्याओं का समाधान संभव है.
कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. प्रियंका श्रीवास्तव और कार्यक्रम संयोजक डॉ. विश्वजीत करन ने एआई, मशीन लर्निंग, न्यूरल नेटवर्क और लार्ज लैंग्वेज मॉडल जैसे विषयों की जानकारी देते हुए 5 दिवसीय कार्यक्रम के विभिन्न सत्रों के बारे में बताया.
इंजीनियरिंग एवं एप्लाइड साइंसेज के डीन डॉ. पंकज कुमार गोस्वामी ने बताया कि विश्वविद्यालय में रोबोटिक्स लैब और एआई-एमएल से संबंधित कई प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं, जो शोध और नवाचार को बढ़ावा दे रही हैं.
तकनीकी सत्र में कुलपति प्रो. सी. जगनाथन ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मूल अवधारणा पर व्याख्यान देते हुए बताया कि एआई के माध्यम से ऐसे सॉफ्टवेयर विकसित किए जा सकते हैं जो पढ़ने, समझने, अनुवाद करने, सीखने और निर्णय लेने जैसे कार्य कर सकें. उन्होंने मशीन लर्निंग, नैचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग और लार्ज लैंग्वेज मॉडल जैसे विषयों पर भी विस्तार से चर्चा की.
सत्र के दौरान डॉ. विश्वजीत ने प्रतिभागियों को एआई और मशीन लर्निंग की मूल अवधारणाओं से परिचय कराया. वहीं डॉ. प्रियंका श्रीवास्तव ने एथिकल एआई पर जोर देते हुए फिशिंग अटैक, साइबर अटैक, स्कैम और डीपफेक जैसे खतरों के प्रति आगाह किया. कार्यक्रम में प्रश्नोत्तर सत्र का भी आयोजन किया गया.
इस अवसर पर प्लेसमेंट को-ऑर्डिनेटर आनंद कुमार विश्वकर्मा, श्वेता मेहता, निशांत कुमार सहित बड़ी संख्या में शिक्षक और विद्यार्थी उपस्थित रहे. कार्यक्रम का संचालन डॉ. दीप्ति कुमारी ने किया.
सरला बिरला विश्वविद्यालय के प्रतिकुलाधिपति बिजय कुमार दलान तथा राज्यसभा सांसद सह निदेशक (प्लानिंग एंड डेवलपमेंट) डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने भी इस फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम के आयोजन पर हर्ष व्यक्त किया.
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