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एंबुलेंस सेवा का हालः डीजल नहीं होने से ब्रेन हेमरेज पीड़ित घंटों तड़पता रहा

Latehar: लातेहार जिला के बरवाडीह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है. ब्रेन हेमरेज से पीड़ित 45 वर्षीय राजू राम को बेहतर इलाज के लिए रेफर किया गया था, लेकिन सरकारी एम्बुलेंस में डीजल नहीं होने के कारण मरीज को घंटों अस्पताल में ही रोके रखा गया. इस दौरान उसकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई, लेकिन अस्पताल प्रबंधन की ओर से समय पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया.

 

परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने स्पष्ट कर दिया था कि जब तक एम्बुलेंस के लिए डीजल के पैसे नहीं दिए जाएंगे, तब तक मरीज को रेफर नहीं किया जा सकता. एम्बुलेंस चालक और संबंधित कर्मियों ने डीजल के नाम पर 600 रुपये की मांग की. आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से होने के कारण परिजन तत्काल इतनी राशि की व्यवस्था नहीं कर सके. इससे मरीज को समय पर उच्च चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पाई.

 

घंटों तक मरीज के तड़पने और इलाज में देरी से परिजनों का आक्रोश बढ़ता गया. अस्पताल परिसर में हंगामे की स्थिति उत्पन्न हो गई. स्थानीय लोगों ने भी अस्पताल प्रबंधन की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए. लोगों का कहना था कि जब सरकार मुफ्त एम्बुलेंस सेवा का दावा करती है, तो फिर आपात स्थिति में मरीजों से डीजल के पैसे क्यों मांगे जा रहे हैं.

 

मामले की जानकारी मिलने पर पश्चिमी जिला परिषद सदस्य संतोषी शेखर अस्पताल पहुंचे. उन्होंने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अपनी जेब से 600 रुपये देकर एम्बुलेंस में डीजल भरवाया. इसके बाद सरकारी एम्बुलेंस मरीज को लेकर एमएमसीएच, मेदिनीनगर के लिए रवाना हुई. हालांकि तब तक मरीज की हालत बेहद नाजुक हो चुकी थी.

 

इस घटना ने एक बार फिर सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था और मुफ्त एम्बुलेंस सेवा की वास्तविक स्थिति को उजागर कर दिया है. परिजनों और स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई, एम्बुलेंस सेवा की नियमित निगरानी और आपात मरीजों के साथ मानवीय व्यवहार सुनिश्चित करने की मांग की है.

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