Lagatar Desk: मोदी सरकार ने 16 अक्टूबर को यह संकेत दिया है कि वह परिसीमन बिल ला सकती है. माना जा रहा था कि तमिलनाडु की डीएमके पार्टी इस बिल का सपोर्ट करेगी. ऐसी खबरें भी प्रचारित-प्रसारित की गईं. लेकिन शनिवार को चेन्नई में हुई डीएमके की बैठक के बाद परिसीमन को लेकर मोदी सरकार की चिंता बढ़ती दिख रही है.
22 सांसदों वाली पार्टी डीएमके ने जो चार प्रमुख मांगें रखी हैं, उससे हद तक साफ हो रहा है कि वह एनडीए खेमे में नहीं जाने वाला. उसने सर्वसम्मति से चार प्रस्ताव पारित किए हैं.
- EVM की जगह चुनाव बैलेट पेपर से करवाए जाएं.
- CEC ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा हो.
- SIR प्रक्रिया पूरी तरह से बंद हो.
- देश में चल रहे छात्र और युवा आंदोलनों को अपना पूर्ण समर्थन देने का निर्णय लिया.
परिसीमन की चर्चा जोर पकड़ी
दरअसल, परिसीमन की चर्चा 16 अक्टूबर को तब शुरु हुई, जब सूत्रों के हवाले से मीडिया रिपोर्ट्स राजनीतिक हलकों में सुर्खियों में रही.
इसी माह के अगले हफ्ते में मोदी सरकार संसद का विशेष सत्र बुला सकती है. सत्र में परिसीमन बिल और महिला आरक्षण बिल को लाया जाना संभावित है. साल 2023 में मोदी सरकार ने महिला बिल पास किया था. लेकिन इसे लागू करने के लिए दो शर्तें थी, या तो अगली जनगणना हो जाये या जब परिसीमन लागू हो जाये.
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इस खबर के बाद कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकर्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा. परिसीमन और महिला आरक्षण के मुद्दे पर यह उनका चौथा पत्र है. पत्र में उन्होंने मांग की कि नए प्रस्तावों को लाने से पहले सर्वदलीय बैठक हो. सर्वदलीय बैठक में चर्चा के बाद ही बिला लाया जाये. बिल को जबरदस्ती पास कराने की कोशिश ना हो.
इसी दौरान यह खबर भी आयी थी कि परिसीमन के मुद्दे पर दक्षिण की बड़ी राजनीतिक पार्टी डीएमके, मोदी सरकार को सपोर्ट कर सकती है. इस अनुमान की वजह यह थी कि अभी यह पार्टी तमिलनाडु में विपक्ष में है. तमिलनाडु में गठबंधन की सरकार है और कांग्रेस सरकार में सहयोगी की भूमिका में है.
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