New Delhi : अरुणाचल प्रदेश के दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने चीन को टारगेट करते हुए कहा है कि कोई भी हमारी सीमा पर आंख उठा कर नहीं देख सकता है. वह जमाना अब चला गया है जो भारत की जमीन पर कोई भी अतिक्रमण कर सकता था. सुई की नोक जितनी जमीन भी कोई नहीं ले सकता. शाह ने कहा कि 1962 की लड़ाई में जो आए थे, उन्हें वापस जाना पड़ा था. इसका कारण यहां के लोगों की देशभक्ति है. शाह ने कहा कि भारत की सुई की नोक जितनी जमीन भी कोई नहीं ले सकता है. शाह ने इस दौरान बीजेपी के अरुणाचल में किए गए काम गिनाते हुए कहा कि 10 साल पहले वह जमाना था कि यहां पर गांव खाली हो रहे थे, विकास नहीं था. लेकिन केंद्र की मोदी सरकार ने इन गांवों का ध्यान रखा और विकास को यहां तक पहुंचाया है. यह भारत के पहले गांव हैं जहां पर रोजगार पहुंचाने का काम भी बीजेपी की सरकार ने किया था. उन्होंने कहा, अरुणाचल में कोई भी नमस्ते नहीं करता, सब जय हिंद बोल कर एक दूसरे का अभिवादन करते हैं. यह देख कर हृदय देशभक्ति से भर जाता है. अरुणाचलवासियों के इसी जज्बे के कारण 1962 की लड़ाई में जो अतिक्रमण करने आया था उसे वापस जाना पड़ा था.
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| The entire country can sleep peacefully in their homes today because our ITBP jawans & Army is working day & night on our borders. Today, we can proudly say that no one has the power to cast an evil eye on us: Union Home Minister Amit Shah in Kibithoo, Arunachal Pradesh pic.twitter.com/WNJra9iFuq
— ANI (@ANI) April">https://twitter.com/ANI/status/1645382193051758592?ref_src=twsrc%5Etfw">April
10, 2023
29067 गावों में होगा वाइब्रेंट विलेज का काम
अमित शाह ने यहां किबिथू इलाके में वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम की शुरुआत की. इससे सीमावर्ती गांवों में रहने वाले लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार आएगा. साथ ही पलायन रोकने और सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिहाज से भी `वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम` काफी अहम माना जा रहा है. अरुणाचल का किबिथू गांव चीन से सटा हुआ है. अमित शाह की वाइब्रेंट विलेज योजना पर 4800 करोड़ रुपये खर्च होंगे. इस कार्यक्रम के तहत अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, उत्तराखंड, हिमाचल और लद्दाख के 19 जिलों के कुल 2967 गांवों में जीवन स्तर सुधार का प्रयास किया जा रहा है. उनका दौरा काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि हाल में चीन ने अरुणाचल के 11 स्थानों के नाम बदल दिए थे. इसके बाद दोनों देशों के बीच फिर से तनाव की स्थिति बन रही है. ऐसे में गृह मंत्री का अरुणाचल दौरा चीन के लिए एक बड़ा संकेत माना जा रहा है.
चीन ने किया दौरे के विरोध
इधर, गृहमंत्री के भारत – चीन बॉर्डर से सटे गांवों में दौरे का चीन ने विरोध किया है. चीन अरुणाचल के इस हिस्सा को चीन का हिस्सा बताया है. चीन ने कहा है कि जांगनान का दौरा करके गृहमंत्री अमित शाह ने चीन की क्षेत्रीय संप्रभुता का उल्लंघन किया है. इस दौरान चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने वांग वेनबिन ने कहा कि यह दौरा सीमा पर शांति के लिए अनुकूल नहीं है. विवादित सीमा पर चीन और भारत के बीच कई झड़पें हुई हैं और हाल के वर्षों में पर्वतीय क्षेत्रों में हुई झड़पों ने संबंधों को गंभीर रूप से तनावपूर्ण बना दिया है.
उसी जगह पहुंचे शाह जिस पर चीन करता है दावा
गृह मंत्री अमित शाह की यह यात्रा अरुणाचल प्रदेश में चीन के मंसूबों का जवाब है, क्योंकि यह उसी क्षेत्र में है जिस पर चीन आए दिन अपना दावा करता है. वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम का उद्देश्य उत्तरी सीमा के अपने हिस्से में स्थायी गांवों को प्रोत्साहित करना है.
क्या है वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम?
वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम (Vibrant Villages Programme) का मुख्य उद्देश्य भारतीय सीमा से जुड़े गांवों में विकास को बढ़ावा देना है. इसके लिए सरकार ने वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2025-26 के लिए सड़क संपर्क के लिए विशेष रूप से 2500 करोड़ रुपये सहित 4800 करोड़ रुपये के केंद्रीय योगदान के साथ ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ (वीवीपी) को मंजूरी दी है. वीवीपी एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसके तहत व्यापक विकास के लिए अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के उत्तरी सीमा से सटे 19 जिलों के 46 ब्लॉकों में 2967 गांवों की पहचान की गई है. पहले चरण में, प्राथमिकता के आधार पर 662 गांवों की पहचान की गई है, जिनमें अरुणाचल प्रदेश के 455 गांव शामिल हैं.
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