Shubham Kishor Ranchi : एचईसी में रावण का पुतला अचानक खुद ही जल गया. वहीं कार्यक्रम में मौजूद अतिथि देखते रह गए. पढ़ें स खबर में कि क्या है पूरा मामला? दरअसल रांची के एचईसी में हर साल की भांति इस वर्ष भी रावण दहन कार्यक्रम का आयोजन किया गया. शालीमार मैदान में आयोजित कार्यक्रम में रावण और कुंभकर्ण के 55 फिट के पुतले लगाए गए थे. इस वर्ष वाटर प्रूफ पुतलों का निर्माण करवाया गया था. साथ ही लंका दहन के लिए लंका भी बनाया गया था. शनिवार की शाम रावण दहन समिति ने कार्यक्रम की शुरुआत की. बतौर मुख्य अतिथि झारखंड के वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव, विशिष्ट अतिथि पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय, राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश समेत कई गणमान्य मौके पर मौजूद रहे. https://lagatar.in/and-ravana-burnt-himself-in-hec-like-this/ravan-dahan1/"
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alt="fcvbcv" width="600" height="400" /> शानदार आतिशबाजियों के साथ रावण दहन कार्यक्रम शुरू किया गया. हजारों की संख्या में मौजूद स्थानीय लोग आतिशबाजी का लुत्फ उठा रहे थे. अतिथियों के संबोधन के बाद सभी मंच से उतरकर मैदान में बने लंका की ओर बढ़ने लगे. तभी एक पटाखा नीचे ही फट गया और चिंगारी रावण के पुतले पर जा लगी. कागज, पोरा और बांस से बने पुतले को मानों उस एक चिंगारी की ही जरूरत थी. एक चिंगारी ने रावण के पुतले को जला दिया. सभी अतिथि और मौके पर मौजूद लोग देखते रह गए. क्षणभर में रावण का पुतला जमीन पर था. खैर रावण के पुतले के समय से पहले जलने से सभी में निराशा तो थी, लेकिन अब कुछ बदला नहीं जा सकता था. फिर अतिथियों ने लंका दहन किया और उसके बाद कुंभकर्ण के पुतले में आग लगाई. कुंभकर्ण का पुतला जलने के बाद कार्यक्रम समाप्त हुआ. इसे भी पढ़ें -स्टार">https://lagatar.in/star-health-data-leaked-hackers-demanded-ransom-of-68000/">स्टार
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alt="fcvbcv" width="600" height="400" /> शानदार आतिशबाजियों के साथ रावण दहन कार्यक्रम शुरू किया गया. हजारों की संख्या में मौजूद स्थानीय लोग आतिशबाजी का लुत्फ उठा रहे थे. अतिथियों के संबोधन के बाद सभी मंच से उतरकर मैदान में बने लंका की ओर बढ़ने लगे. तभी एक पटाखा नीचे ही फट गया और चिंगारी रावण के पुतले पर जा लगी. कागज, पोरा और बांस से बने पुतले को मानों उस एक चिंगारी की ही जरूरत थी. एक चिंगारी ने रावण के पुतले को जला दिया. सभी अतिथि और मौके पर मौजूद लोग देखते रह गए. क्षणभर में रावण का पुतला जमीन पर था. खैर रावण के पुतले के समय से पहले जलने से सभी में निराशा तो थी, लेकिन अब कुछ बदला नहीं जा सकता था. फिर अतिथियों ने लंका दहन किया और उसके बाद कुंभकर्ण के पुतले में आग लगाई. कुंभकर्ण का पुतला जलने के बाद कार्यक्रम समाप्त हुआ. इसे भी पढ़ें -स्टार">https://lagatar.in/star-health-data-leaked-hackers-demanded-ransom-of-68000/">स्टार
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