ट्रेनिंग के लायक नहीं दी जाती थी किट
सैनी का कहना था कि वे लोकल गेंद से ही खिलाड़ियों को प्रैक्टिस करवा रहे थे. नरेंद्र सैनी ने कहा था कि जिस गेंद से वह प्रैक्टिस करवा रहे हैं वह ट्रेनिंग के लायक नहीं है और उसमें हिट मारने से खिलाड़ियों के हाथ झनझनाते हैं. वे इस बात से दुखी थे कि जो मेहनत वह कर रहे हैं, उसके नतीजे से वह संतुष्ट नहीं हैं. जो सामान प्रैक्टिस के लिए मिल रहे थे, उससे संतुष्ट होने का सवाल ही नहीं है. इस दौरान उन्होंने खेल निदेशक सह झारखंड खेल प्राधिकरण को एक दर्जन से ज्यादा पत्र लिखे. साथ ही नरेंद्र सैनी ने यह भी कहा था कि उन्होंने कई अच्छे ऑफर सिर्फ इसलिए ठुकरा दिए क्योंकि उन्हें झारखंड से व्यक्तिगत रूप से लगाव है, उन्होंने कहा था कि अगर स्थितियां नहीं सुधरी तो उन्हें कोई कड़ा फैसला लेने को मजबूर होना पड़ेगा.झारखंड को कर्मभूमि मानते हैं
मूल रूप से हरियाणा के रहने वाले नरेंद्र सैनी अपनी कर्मभूमि झारखंड को हो मानते आए हैं और उन्होंने अपने जीवन के 22 साल झारखंड में हॉकी खिलाड़ियों को निखारने में बिताया. नरेंद्र सिंह सैनी के प्रशिक्षण के बाद झारखंड की 60 से ज्यादा महिला खिलाड़ियों ने देश का प्रतिनिधित्व किया, जिनमें भारतीय हॉकी टीम की कप्तान रही सुमराय टेटे और असुंता लकड़ा भी शामिल हैं.हॉकी झारखंड की पहचान है
मामूम हो कि हॉकी झारखंड की पहचान है. जयपाल सिंह मुंडा, सिलवानुस डुंगडुंग, सुमराय टेटे, सावित्री पूर्ति, अशुंता लकड़ा से लेकर निक्की प्रधान तक सैकड़ों नाम हैं जिन्होंने देश का प्रतिनिधित्व किया है, ओलंपिक जीता है. इनमें से कइयों को हॉकी की बारीकियां सीखाने वाले नरेंद्र सैनी का इस्तीफा झारखंड हॉकी के लिए अच्छा नहीं कहा जा सकता है. 1 महिने पहले उन्होंने निदेशालय में इस बात की सूचना दे दी थी. इसे भी पढ़ें- जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-hemant-sarkar-made-lathi-charge-out-of-fear-of-bjp-workers-kulwant-singh-bunty/">जमशेदपुर: हेमंत सरकार ने भाजपा कार्यकर्ताओं से डरकर लाठी चार्ज करवाया- कुलवंत सिंह बंटी [wpse_comments_template]

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