Ranchi: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के तहत 1,042 नवचयनित इंटर एवं स्नातक प्रशिक्षित सहायक आचार्यों को नियुक्ति-पत्र सौंपे. वर्ष 2016 में JTET परीक्षा पास करने वाले अभ्यर्थियों को करीब 9 साल के लंबे इंतजार के बाद यह नियुक्ति मिली. नियुक्ति-पत्र मिलते ही अधिकांश अभ्यर्थियों के चेहरे पर खुशी और सुकून साफ नजर आया. हालांकि, इस खुशी के बीच कुछ ऐसी कहानियां भी सामने आईं, जिन्होंने नियुक्ति प्रक्रिया में हुई लंबी देरी की टीस और व्यवस्था की विडंबना को भी उजागर कर दिया.
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कई अभ्यर्थी ऐसे हैं जिनकी सेवानिवृत्ति में अभी 10 से 12 वर्ष का समय बचा है, लेकिन कुछ अभ्यर्थियों की उम्र 50 वर्ष से अधिक हो चुकी है. इनमें 54 वर्षीय भारती धान, जिनकी नियुक्ति खूंटी में हुई है, भी शामिल हैं. उन्होंने 23 वर्षों तक पारा शिक्षक के रूप में सेवा दी. सरकारी नौकरी मिलने की खुशी उनके चेहरे पर थी, लेकिन मन में इस बात की कसक भी थी कि अगर यह नियुक्ति कुछ वर्ष पहले मिल जाती तो वे अपने अनुभव और कौशल का लाभ विद्यार्थियों को लंबे समय तक दे पातीं. अब उनकी सेवानिवृत्ति नजदीक होने के कारण यह खुशी अधूरी सी महसूस हो रही है.
वहीं, समारोह में एक ऐसे अभ्यर्थी भी पहुंचे जिनकी कहानी सबसे ज्यादा चर्चा में रही. नंदलाल भवानी, जिन्होंने 21 वर्षों तक पारा शिक्षक के रूप में काम किया, उन्हें सोमवार को नियुक्ति-पत्र मिला, जबकि मंगलवार को उनकी सेवानिवृत्ति है. उन्होंने कहा, "नौकरी तो मिल गई, लेकिन अगर मैं सेवा ही नहीं दे पाऊंगा तो इस नियुक्ति का क्या मतलब?" उनके चेहरे पर हल्की मुस्कान थी, लेकिन आंखों में मायूसी साफ झलक रही थी. उन्होंने सरकार से सेवा विस्तार (एक्सटेंशन) या पेंशन की व्यवस्था करने की मांग की, ताकि उनकी नियुक्ति सार्थक हो सके.
ऐसी ही पीड़ा मोहम्मद नईम अंसारी ने भी साझा की. उन्होंने 24 वर्षों तक पारा शिक्षक के रूप में सेवा दी, लेकिन उनका सेवानिवृत्त हुए एक महीना बीत चुका है. इसके बावजूद उन्हें अब नियुक्ति-पत्र मिला. उन्होंने कहा, "2016 में JTET पास किया था, लेकिन नियुक्ति तब मिली जब मैं रिटायर हो चुका हूं. अब इस नियुक्ति का मैं क्या करूं?" उन्होंने कहा कि वर्षों तक सेवा देने के बाद सेवानिवृत्ति के पश्चात नियुक्ति-पत्र मिलना बेहद निराशाजनक है. उन्होंने सरकार से दो वर्ष का सेवा विस्तार देने की मांग की, ताकि उन्हें पेंशन का लाभ मिल सके और उनके परिवार का भविष्य सुरक्षित हो सके.
1,042 नियुक्ति-पत्रों के इस समारोह में जहां एक ओर वर्षों का इंतजार खत्म होने की खुशी थी, वहीं दूसरी ओर देरी से हुई नियुक्तियों ने कई अभ्यर्थियों के मन में व्यवस्था को मायूसी भी दिखी. उनके लिए यह नियुक्ति उपलब्धि से ज्यादा एक अधूरी खुशी बनकर रह गई.
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