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पुलिस के साथ फॉरेंसिक जांच टीम का होना जरूरी होता है
मुख्य सचिव ने कहा कि किसी अपराध की जांच के लिए पुलिस के साथ फॉरेंसिक जांच टीम का होना जरूरी होता है. पहले झारखंड में अधिकारियों की कमी थी, इस कारण सभी जांच गुजरात भेजे जाते थे. जहां जांच कार्य को प्राथमिकता नहीं मिलती थी. जिससे पुलिस की जांच प्रभावित होती थी. लेकिन अब इससे मुक्ति मिलेगी. नवनियुक्त अधिकारियों उम्मीद करते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि फॉरेंसिक के लिए आये सभी जांच सही समय पर पूरे होंगे, साथ ही बैकलॉग को क्लियर करने की रणनीति पर भी वह काम करें. इसके लिए उन्होंने गृह विभाग से अनुरोध किया कि 15 दिनों के अंदर एक ओवरटाइम सिस्टम काम करने की रणनीति बनाएं, जिसमें काम करने वाले अधिकारियों को सैलरी के साथ इंटेंसिव भी मिले. ताकि वे उत्साह से काम कर पाये. इसे भी पढ़ें - राहुल">https://lagatar.in/rahul-gandhi-told-party-workers-congress-leader-cannot-be-intimidated-agneepath-scheme-has-to-be-withdrawn/">राहुलगांधी ने पार्टी वर्करों से कहा, कांग्रेस के नेताओं को डराया-धमकाया नहीं जा सकता, अग्निपथ स्कीम वापस लेनी होगी
खाली पड़े पदों को नियम के तहत जल्द भरने की प्रक्रिया शुरू करें
राजीव अरुण एक्का ने कहा कि जेएसएससी (JSSC) और जेपीएससी(JPSC) ने जितनी जल्दी से इन अधिकारियों की नियुक्ति पत्र दिया है, वह अपने आप में माइल स्टोन है. उन्होंने कहा कि सीएम हेमंत सोरेन ने अपने अधीन गृह विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया था कि खाली पड़े पदों को नियम के तहत जल्द से जल्द भरने की प्रक्रिया शुरू करें. उसी का परिमाण है कि आज कुल 93 अधिकारियों को नियुक्ति पत्र दिया जा रहा है. इसे भी पढ़ें - मांडर">https://lagatar.in/mandar-by-election-polling-party-left-voting-will-be-held-tomorrow/">मांडरउपचुनाव : पोलिंग पार्टी हुई रवाना, कल को होगी वोटिंग
फोरेंसिक जांच के लिए हमेशा दूसरे राज्यों पर निर्भर रहना पड़ता था
राजेश कच्छप ने कहा कि जो काम प्राथमिकता के साथ 20 - 21 साल पहले ही पूरा हो जाना चाहिए था. वह आज तक पूरा नहीं हो पाया है. राज्य में जो भी छोटी बड़ी आपराधिक घटनाएं होती थी, उन सभी के फोरेंसिक जांच के लिए हमेशा झारखंड को बिहार सहित दूसरे राज्यों पर निर्भर रहना पड़ता था. इससे जांच काम काफी प्रभावित होती थी. लेकिन आज मुख्यमंत्री द्वारा 37 सहायक निदेशक व वरीय वैज्ञानिक पदाधिकारियों और 56 वैज्ञानिक सहायकों को नियुक्ति पत्र देकर इन समस्याओं को खत्म करने का काम हुआ है. इसे भी पढ़ें - अग्निपथ">https://lagatar.in/youth-rjds-march-to-raj-bhavan-in-protest-against-agneepath-scheme-state-president-said-central-government-is-playing-with-the-future-of-youth/">अग्निपथयोजना के विरोध में युवा राजद का राजभवन मार्च, प्रदेश अध्यक्ष ने कहा- केंद्र सरकार युवाओं के भविष्य के साथ कर रही खिलवाड़
फोरेंसिक लैब तो था, पर जांच करने के लिए अधिकारियों की काफी समस्या थी
डीजीपी ने कहा कि पूर्व में क्रिमनल जस्टिस सिस्टम के लिए एक कमिटी बनी थी. कमिटी ने एक सुझाव दिया था कि पुलिस की जांच के साथ एक फॉरेसिक जांच की भी टीम हो. राज्य में फोरेंसिक लैब तो था, पर जांच करने के लिए अधिकारियों की काफी समस्या थी. इससे राज्य में कांडों में अनुसंधान मे काफी दिक्कत आती थी. लेकिन अधिकारियों की नियुक्ति होने से इन समस्याओं के निदान हो सकेगी. इसे भी पढ़ें - एकनाथ">https://lagatar.in/in-maharashtra-eknath-shinde-and-40-mlas-revolt-politics-uddhav-thackeray-may-resign-as-cm/">एकनाथशिंदे और 40 विधायकों की बगावत से महाराष्ट्र की सियासत चरम पर, उद्धव ठाकरे दे सकते हैं सीएम पद से इस्तीफा [wpse_comments_template]

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