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क्या जिंदगियों को बचाने के मुकाबले अपने नेता की छवि को बचाने में आपकी दिलचस्पी ज़्यादा है?

Faisal Anurag

“झूठ नजरअंदाज करना अच्छी बात नहीं है. ऐसा करके आप झूठे को बढ़ावा दे रहे होते हैं”. डीक चेनी ने यह कहा है. डोनाल्ड ट्रंप की भक्त रही डीक चेनी अमेरिका के संसद प्रतिनिधि सभा की महत्वपूर्ण नेता रही हैं. उन्होंने ट्रंप को ले कर ही यह टिप्प्णी किया है. लेकिन अपने आचरण और बड़बोलेपन के कारण ट्रंप आज कोई अकेला व्यक्ति नहीं रह गया है. एशिया से लेकर लातिन अमेरिका तक कई ट्रंप हैं जो झूठ और बड़बोलेपन के प्रतीक बने हुए हैं.

भारत के संदर्भ में भी यह टिप्पणी महत्वपूर्ण है. कोविड की इस लहर ने पहली बार नरेंद्र मोदी की भीमकाय छवि में सूराख कर दिया है. न्यूयार्क टाइम्स के अनुसार नरेंद्र मोदी  का इस समय के कारण लोकप्रियता ग्राफ में भी भारी गिरावट हुई है. ऐसे समय में नेतृत्व जबावदेही लेने और महामारी में लोगों की संवेदनाओं को सहलाने के बजाय डैमेज कंट्रोल में लग गयी है.  पत्रकार जय सुशील के अनुसार राष्ट्रीय स्वयं सेवक इसी डैमेज कंट्रोल अभियान के लिए 11 मई से  ऑनलाइल इवेंट शुरू किया है. इसे पॉजिटिवीटी अनलिमिटेड का नाम दिया गया है. इसके तहत ख्यातिप्राप्त मोटिवेटर धर्मगुरू और प्रमुख उद्योगपतियों के व्याख्यान कराने की योजना है. इस इवेंट के तहत मोहन भागवत का भी देश के नाम व्याख्यान होने जा रहा है. डैमेज कंट्रोल के लिए केंद्र के ज्वाइंट सेक्रेटरी लेवल के चुने हुए अधिकारियों को भी लगाया जा रहा है. जिन्हें एक वर्कशाप में इस कार्य का प्रशिक्षण दिया गया है.

जय सुशील की सूचनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है. क्योंकि भाजपा आईटी सेल ने पॉजिटीवीटी अभियान शुरू कर दिया है जिसें अमित मालवीय के ट्वीट साबित करते हैं. यहीं नहीं मंत्रियों को भी सरकार और नरेंद्र मोदी की छवि  के लिए ऑनलाइन सक्रियता तेज करने को कहा गया है. जेपी नड्डा का सोनिया गांधी को लिखा गया पत्र भी इसी अभियान का हिस्सा है. मान लिया जाये कि जिस अनुपात में लोग मरे हैं और मर रहे हैं. और गांवों में दहशत तेजी से फैल रहा है उसे इन अभियानों से कम कर दिखाया जा सकता है. गंगा, जमुना और सरयू में बहते शवों के संदेश को इवेंट मैनेजमेंट से पॉजिटिविटी में कितना बदला जा सकता है. 1918—19 के वे दृश्य भारत 103 सालों के बाद भी देख रहा है. जिसके विश्वगुरू होने का डंका केंद्र सरकार प्रधानमंत्री के नेतृत्व में बजा रही है. उस समय तो देश गुलाम था.नदियों के शवों से भर जाने के उस दौर की कहानी यदि 21 सदी में भी दुहरायी जा रही है. तो क्या यह राष्ट्रीय शर्म का विषय नहीं है.

सवाल यह नहीं है कि छवि बने सवाल तो यह है कि वे हालात ही क्यों बने हैं कि पवित्र नदियों में शव बह रहे हैं और उसकी जिम्मेदारी लेने को कोई सरकार तैयार नहीं है. पारंपरिक भारत में शवदाह एक पवित्र कार्य है उसे यूं ही तो नदी में नहीं बहा दिया गया है. तमाम धार्मिक बंधनों के बावजूद उस पीड़ा और मजबूरी को भी समझने की जरूरत है जिसमें किसी भी देश में नदियों में शव फेंक दिए जा रहे है.हेराफरी के आंकड़ों से पॉजिटीविटी के सपने देख लेना एक बात है. लेकिन हकीकत तो बयान होगी ही और उसकी पहुंच को रोका भी नहीं जा सकता है. हम एक ऐसे दौर में हैं जब दिल्ली पुलिस का क्राइम ब्रांच लोगों को दवा,ऑक्सीजन,बेड दिलाने वालों के खिलाफ पूछताछ कर रहा है. आप विधायक दिलीप पांडेय से पूछताछ की जा चुकी है और इसमें युवा कांग्रेस के अध्यक्ष श्रीनिवास का नाम भी सूची में हैं जिन्होने 2 लाख से ज्यादा लोगों को मदद पहुंचायी है. पप्पू यादव गिरफ्तार हैं क्यों कि उनके सच ने बिहार की सरकार, नीतीश कुमार और भाजपा को कठघड़े में खड़ा कर दिया. छवि निर्माण के डैमेज कंट्रोल से क्या इन हकीकतों को लोग भूल जाएंगे.

दक्षिण भारतीय फिल्मों के बड़े संगीतकार टीएम कृष्णा ने इंडियन एक्सप्रेस में भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के नाम एक लंबा पत्र लिखा है. भाजपा का कोई भी डैमेज कंट्रोल अभियान उनकी इन बातों को कैसे झूठरा  सकता है  "आपको सचमुच इस तर्क में भरोसा है कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया की दिलचस्पी सिर्फ़ भारत की साख को बिगाड़ने में है, मैं नहीं मान सकता. तस्वीरें, आंकड़ें, खबरें—सब सच हैं. चिताओं पर जलते हुए शव असली मानव-देह हैं. लोग हर सांस के लिए संघर्ष कर रहे हैं, मदद की भीख मांग रहे हैं. सरकार से नहीं, दूसरे नागरिकों से. क्या इसने आपको अंदर से हिला नहीं दिया है? आपने और मैंने इस महामारी में कितने ही दोस्तों को खोया है, और तब भी क्या आप यह नहीं कहना चाहते कि केंद्र सरकार इस सबके लिए ज़िम्मेदार है? क्या ज़िंदगियों को बचाने के मुक़ाबले अपने नेता की छवि को बचाने में आपकी दिलचस्पी ज़्यादा है?"

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