Dhanbad News: शिक्षा विभाग में कथित भ्रष्टाचार, ट्रांसफर-पोस्टिंग में पैसों के खेल और ग्रामीण-शहरी स्कूलों में शिक्षकों की असमान तैनाती के खिलाफ निरसा विधायक अरूप चटर्जी की आर-पार की जंग रंग लाई है. जिला समाहरणालय परिसर में पिछले चार दिनों से जारी विधायक का अनिश्चितकालीन अनशन शुक्रवार देर शाम प्रशासन के लिखित आश्वासन के बाद समाप्त हो गया.
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उपायुक्त आदित्य रंजन की ओर से दो महीने के भीतर शिक्षकों की ट्रांसफर-पोस्टिंग से जुड़ी पूरी रिपोर्ट सार्वजनिक करने और गड़बड़ी की निष्पक्ष जांच कराने का लिखित पत्र मिलने के बाद विधायक ने आंदोलन वापस लिया. इसके बाद जिला शिक्षा अधीक्षक (DSE) और जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने विधायक को जूस पिलाकर उनका अनशन तुड़वाया.
निरसा विधायक अरूप चटर्जी का मुख्य मुद्दा शिक्षकों की मनमानी प्रतिनियुक्ति और ग्रामीण एवं शहरी स्कूलों के बीच शिक्षकों की तैनाती में असमानता था. विधायक का आरोप था कि शहरी क्षेत्रों के स्कूलों में जरूरत से अधिक शिक्षक तैनात हैं जबकि ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालय शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं.इससे ग्रामीण स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित हो रही है और इसका सबसे अधिक खामियाजा गरीब परिवारों के बच्चों को भुगतना पड़ रहा है.
विधायक ने पूर्व डीएसई के कार्यकाल में शिक्षकों की पोस्टिंग और प्रतिनियुक्ति में बड़े पैमाने पर अनियमितता बरते जाने का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की जांच की मांग की थी.
उनके आंदोलन को राजनीतिक और सामाजिक समर्थन भी मिला.गुरुवार को झामुमो विधायक मथुरा महतो धरना स्थल पर पहुंचे और आंदोलन का समर्थन किया. वहीं शुक्रवार को माले कार्यकर्ताओं ने जुलूस निकालकर शिक्षा विभाग में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की.
मौखिक दिलासे पर नहीं बनी बात, लिखित पत्र पर माने
अनशन के दौरान शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों ने विधायक को मनाने की कई कोशिशें कीं और जुबानी आश्वासन दिया. लेकिन विधायक ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक उपायुक्त की ओर से समयबद्ध जांच का लिखित पत्र नहीं मिलेगा तब तक आंदोलन जारी रहेगा.अंततः प्रशासन को लिखित कदम उठाना पड़ा.
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