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JSSC-CGL नियुक्ति रद्द करने के सरकार के आदेश को हाईकोर्ट ने किया निरस्त

Ranchi : हाइकोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक रोशन की कोर्ट ने इस नियुक्ति को रद्द किये जाने को चुनौती देने वाली रमेश उरांव एवं अन्य, आकाश गौरव एवं अन्य, निरोज खेस एवं अन्य सहित अलग-अलग कई याचिकाओं पर फैसला सुनाया. राज्य सरकार की ओर से वरीय अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा, वही प्रार्थियों की ओर से  वरीय अधिवक्ता राजीव रंजन, गोपाल शंकर नारायण,  अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा एवं अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने पक्ष रखा था.
 
झारखंड हाईकोर्ट
  • JSSC-CGL परीक्षा से नियुक्त अभ्यर्थियों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत

Ranchi :  झारखंड हाईकोर्ट में JSSC-CGL (विज्ञापन संख्या 10/2023) को रद्द करने संबंधी राज्य सरकार के आदेश को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर झारखंड हाईकोर्ट ने शुक्रवार को फैसला सुनाया. हाइकोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक रोशन की कोर्ट ने उक्त विज्ञापन रद्द करने के 18 अगस्त 2026 के राज्य सरकार की अधिसूचना को रद्द कर दिया.

 

हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद  झारखण्ड सामान्य स्नातक योग्यताधारी संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में सफल लगभग 1932 अभ्यर्थी सरकारी नौकरी में बने रहेंगे. 

 

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के इस संदर्भ में दिया गया आदेश बहाल रहेगा. जो चिह्नित दोषी अभ्यर्थी होंगे, उन्हें नौकरी से बाहर रहना होगा. कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकार या ऑथरिटी सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश को दरकिनार नहीं कर सकती है.

 

कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार का उक्त विज्ञापन को रद्द करने का फैसला प्रकाश कुमार व अन्य के मामले में झारखंड हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के दिए गए फैसले के विरुद्ध है. बिना अनुसंधान खत्म किए, पूरा विज्ञापन रद्द करना गलत होगा, क्योंकि दोषी और निर्दोष को अलग-अलग नहीं किया जा सकता है. जिनकी नियुक्ति हो गई है, उन्हें बिना नियम के और बिना अनुसंधान खत्म किए हटाया जाना उचित नहीं है. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अनुसंधान में जो भी अभ्यर्थी  दोषी पाए जाएंगे, उन्हें नियुक्ति से वंचित किया जाएगा.

 

न्यायमूर्ति दीपक रोशन की कोर्ट ने इस नियुक्ति को रद्द किये जाने को चुनौती देने वाली रमेश उरांव एवं अन्य, आकाश गौरव एवं अन्य, निरोज खेस एवं अन्य सहित अलग-अलग कई याचिकाओं पर फैसला सुनाया है. राज्य सरकार की ओर से वरीय अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने पक्ष रखा था. जबकि प्रार्थियों की ओर से वरीय अधिवक्ता राजीव रंजन, अधिवक्ता गोपाल शंकर नारायण, अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा और अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने दलील पेश की थी.

 

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पूर्व की सुनवाई में प्रार्थियों की ओर से कोर्ट को बताया गया था कि JSSC-CGL का मामला हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से निष्पादित हो चुका है. कोर्ट ने आदेश दिया है कि गलत और सही का फर्क किया जाए और सारी नियुक्ति क्रिमिनल प्रोस्कयूशन पर निर्धारित रहेगी, फिर इस मामले को दोबारा उठाकर नियुक्ति प्रक्रिया रद्द करने का कोई औचित्य नहीं है. यह कोर्ट की अवमानना है. सुप्रीम कोर्ट ने इस संदर्भ में दिशा निर्देश भी दे दिया है. सरकार ने केवल आंदोलनकारी छात्रों को संतुष्ट करने के लिए JSSC-CGL की नियुक्ति रद्द की है.

 

राज्य सरकार की ओर से कहा गया था कि JSSC -CGL परीक्षा को रद्द करने के पीछे का कारण इसमें बड़े पैमाने पर अनियमितता और भ्रष्टाचार है. परीक्षा में सिस्टमैटिक फेलियर हुई है, क्योंकि जिस एजेंसी को परीक्षा आयोजित करने की जिम्मेदारी दी गई थी, उसने क्वेश्चन पेपर को लीक होने दिया. एजेंसी के माध्यम से अभ्यर्थियों को क्वेश्चन के उत्तर नेपाल एवं अन्य जगहों पर रटवाये गये, जिससे परीक्षा की पारदर्शिता कायम नहीं रह सकी.

 

सरकार ने कोर्ट को बताया था कि परीक्षा की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर पब्लिक कॉन्फिडेंस कायम रहना जरूरी है, ऐसी स्थिति में पूरी परीक्षा रद्द करना जरूरी था. अनुसंधान जारी है, अनुसंधान में परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर पुख्ता सबूत मिले हैं. प्राप्त दस्तावेजों से परीक्षा में गड़बड़ी, अनियमितता और भ्रष्टाचार के साफ प्रमाण मिले हैं, जो यह साबित कर रहे हैं कि परीक्षा पारदर्शी नहीं थी. सरकार की तरफ से कहा गया था कि इसमें  दोषी अभ्यर्थियों और निर्दोष अभ्यर्थियों को अलग-अलग करना कठिन है. कैबिनेट ने परीक्षा में प्रश्न पत्र लीक और अनियमिता को देखते हुए परीक्षा रद्द किया.

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