Search

एशिया के सबसे अमीर गौतम अडानी को मिली Z कैटेगरी की सुरक्षा, 24 घंटे साथ रहेंगे 30 सुरक्षाकर्मी

NewDelhi : एशिया के सबसे अमीर और देश के शीर्ष कारोबारी गौतम अडानी को जेड कैटेगरी की सुरक्षा देने का फैसला केंद्र सरकार ने किया है. जानकारी के अनुसार इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) की एक रिपोर्ट के आधार पर यह फैसला लिया गया है. गृह मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार आईबी की ओर से मिली थ्रेट परसेप्शन रिपोर्ट (Threat Perception Report) के आधार पर अडानी को उच्च श्रेणी की सुरक्षा (जेड कैटेगरी) उपलब्ध कराई जायेगी. कहा गया है कि इसका सारा खर्च अडानी खुद उठायेंगे. खबरों के अनुसार अडानी की सुरक्षा में लगभग 30 से अधिक जवानों को तैनात किया जायेगा.  इसे भी पढ़ें : शिवसेना">https://lagatar.in/shiv-sena-wrote-in-saamana-bjp-could-not-make-rcp-singh-the-shinde-of-bihar-nitish-defeated/">शिवसेना

ने सामना में लिखा, आरसीपी सिंह को बिहार का शिंदे नहीं बना पायी भाजपा, नीतीश ने पटखनी दे दी

90 के दशक में किडनैप हो चुके हैं अडानी

जानकारी के अनुसार गौतम अडानी 90 के दशक में एक बार किडनैप चुके हैं. बताया जाता है कि 1997 में अडानी अपने करीबी शांतिलाल पटेल के साथ अहमदाबाद के कर्णावती क्लब से निकले थे. तभी अचानक मोहम्मद पुरा रोड के पास उनकी कार के आगे एक स्कूटर अचानक रुका. साथ ही एक वैन उनकी कार के पास आकर रुकी. उनमें से कुछ लोग उतरे और अडानी और पटेल को बंदूक की नोक पर अगवा कर लिया. हालांकि अपहरण के कुछ दिनों के बाद उन्हें छोड़ दिया गया था.  इसे भी पढ़ें :  जम्मू-कश्मीर">https://lagatar.in/jammu-and-kashmir-suicide-attack-on-army-camp-in-rajouri-3-soldiers-martyred-2-terrorists-killed/">जम्मू-कश्मीर

: राजौरी में आर्मी कैंप पर आत्मघाती हमला , तीन जवान शहीद, 2 आतंकी ढेर

अपहरणकर्ता अडानी से 6 करोड की फिरौती वसूलना चाहते थे

कुछ मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अपहरणकर्ता गौतम अडानी से 6 करोड रुपए की फिरौती वसूलना चाहते थे.  इस मामले में पुलिस ने फजलुर रहमान और भोगीलाल दर्जी उर्फ मामा के साथ 6 अन्य लोगों को आरोपी बनाया था. इस केस की पहली चार्जशीट जनवरी 1998 को दाखिल की गयी थी. हालांकि कोर्ट में पर्याप्त सबूत ना होने के कारण 6 आरोपियों को 2005 में बरी कर दिया गया. 2006 में रहमान को भारत नेपाल सीमा से और 2012 ने भोगीलाल दर्जी को दुबई से गिरफ्तार कर भारत वापस लाया गया. 2018 में अहमदाबाद की कोर्ट में पर्याप्त सबूत ना होने के चलते इन दोनों आरोपियों को भी बरी कर दिया गया. [wpse_comments_template]

Comments

Leave a Comment

Follow us on WhatsApp