Assam/Ranchi : असम में चुनाव का बिगुल बज चुका है. इस दौरान कोकराझार बोडोलैंड क्षेत्र में सियासी सरगर्मी बढ़ गई है. नॉन-बोडो नेताओं ने इस बार एकजुट होकर चुनाव लड़ने की बात कही है. वहीं नॉन बोडो नेता ललित हेम्ब्रोम और बिरसा मुंडा ने कई विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवारों को उतारने का निर्णय लिया और जीत की उम्मीद जताई है.
‘लगातार मीडिया’ के संवाददाता से बातचीत में नॉन-बोडो उम्मीदवारों ने बताया कि, वीटीसी इलाके में करीब 11 लाख मतदाता हैं, जिनमें नॉन-बोडो वोटरों की संख्या भी काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है. उन्होंने बताया कि यदि इस बार नॉन-बोडो समुदाय एकजुट होकर मतदान करता है तो चुनावी नतीजों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है.
नेताओं ने बताया कि पिछले चुनावो में भी इस क्षेत्र से दो बार नॉन-बोडो समुदाय के सांसद चुने जा चुके हैं, जिससे यहां उनकी भूमिका अहम रही है. हाल ही में हुए काउंसिल चुनाव में भी नॉन-बोडो समुदाय ने 7 सीटों पर जीत दर्ज कर अपनी राजनीतिक ताकत का संकेत दिया था.
इधर, आदिवासी नेता ललित हेम्ब्रोम और बिरसा मुंडा ने कहा कि आदिवासी समाज के अधिकार, सुरक्षा और कल्याण से जुड़े मुद्दों को लेकर कई नेताओं के साथ कई दौर की बातचीत हो चुकी है. उन्होंने बताया कि यदि इन मुद्दों पर सहमति बनती है तो इसका असर चुनावी परिणामों में भी दिखाई देगा.
हेम्ब्रोम और मुंडा के बताया कि कोकझरा विधानसभा क्षेत्र 1, 2, 3, 5, 19, 33 और 44—में उनके पक्ष में माहौल बन रहा है. यदि सब कुछ योजना के मुताबिक रहा तो इन सीटों पर जीत हासिल कर आदिवासी समाज की राजनीतिक आवाज को मजबूत किया जाएगा. दोनों नेताओं ने बताया कि नॉन-बोडो और आदिवासी नेताओं की बढ़ती सक्रियता से इस बार बोडोलैंड का चुनाव काफी रोचक और कड़ा मुकाबला बन सकता है.
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