Ranchi: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा हमला करते हुए कहा है कि भ्रष्टाचार और काले कारनामों के उजागर होने की आशंका में संवैधानिक पदों पर आसीन लोगों द्वारा जांच एजेंसियों के कार्यों में बाधा डालना लोकतंत्र के लिए खतरनाक परंपरा की शुरुआत है.
मरांडी ने कोलकाता में एक निजी कंसल्टेंसी पर छापेमारी के दौरान हुई घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई के समय मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का व्यवहार उनके पद की गरिमा के विपरीत था. उन्होंने आरोप लगाया कि इस दौरान संवैधानिक मर्यादाओं को तार-तार किया गया और कानून के शासन को कमजोर करने का प्रयास हुआ.
बाबूलाल ने कहा कि मुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से संयम, सहयोग और कानून के प्रति सम्मान की अपेक्षा होती है, न कि दबाव बनाने और जांच में अवरोध पैदा करने की राजनीति.
बाबूलाल मरांडी ने झारखंड का उदाहरण देते हुए कहा कि यहां भी जांच एजेंसियों को रोकने के लिए इसी तरह का षड्यंत्र रचा गया था. जांच अधिकारियों पर कथित रूप से झूठे मुकदमे दर्ज कराए गए, हथियारबंद भीड़ के जरिए डराने का प्रयास किया गया और सबूत नष्ट करने की कोशिशें हुईं. उन्होंने कहा कि इसके बावजूद कानून ने अपना रास्ता तय किया और अंततः हेमंत सोरेन को जेल जाना पड़ा.
मरांडी ने कहा कि कानून और न्याय का सिद्धांत स्पष्ट है कि आपराधिक आरोप लगने के बाद जांच में सहयोग करना ही आदर्श स्थिति होती है और मुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से इस आचरण की अपेक्षा और भी अधिक होती है.
उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी की झूठ, लूट और तुष्टिकरण की राजनीति अब ज्यादा दिन तक नहीं चल सकती. काले धन और घुसपैठियों के वोट के सहारे लोकतंत्र को प्रभावित नहीं किया जा सकता. बाबूलाल मरांडी ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल की जनता मुख्यमंत्री के कुशासन से त्रस्त हो चुकी है और बदलाव चाहती है.
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