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झारखंड की डेमोग्राफी पर बाबूलाल चिंतित, कहा- आदिवासी आबादी घट रही, सरकार मौन

Ranchi News: भाजपा प्रदेश कार्यालय में रविवार को आयोजित प्रेस वार्ता में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने झारखंड की बदलती जनसंख्या और आदिवासियों के अधिकारों को लेकर हेमंत सरकार और कांग्रेस पर निशाना साधा.
 
बाबूलाल मरांडी, नेता प्रतिपक्ष
  • 1951 में आदिवासियों की आबादी थी 35.38 प्रतिशत
  • 2011 में घटकर रह गई 26.20 प्रतिशत
  • मुस्लिम आबादी 8.9% से बढ़कर हुई 14.53 प्रतिशत

Ranchi News: भाजपा प्रदेश कार्यालय में रविवार को आयोजित प्रेस वार्ता में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने झारखंड की बदलती जनसंख्या और आदिवासियों के अधिकारों को लेकर राज्य सरकार और कांग्रेस पर निशाना साधा. उन्होंने खास तौर पर संथाल परगना में आदिवासी आबादी के घटते प्रतिशत और मुस्लिम आबादी के बढ़ने का मुद्दा उठाया.

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बाबूलाल मरांडी ने कहा कि झारखंड बनने की मांग आजादी के बाद से ही उठती रही है, लेकिन कांग्रेस ने अलग राज्य की मांग को लंबे समय तक नजरअंदाज किया. उन्होंने जयपाल सिंह मुंडा, कार्तिक उरांव और शिबू सोरेन के आंदोलन का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर आदिवासियों के साथ छल करने का आरोप लगाया.

 

उन्होंने जनगणना के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 1951 में झारखंड क्षेत्र में आदिवासियों की आबादी 35.38 प्रतिशत थी, जो 2011 में घटकर 26.20 प्रतिशत रह गई. वहीं मुस्लिम आबादी 8.9 प्रतिशत से बढ़कर 14.53 प्रतिशत हो गई. मरांडी ने कहा कि संथाल परगना में बदलाव और भी ज्यादा चिंता की बात है. उनके अनुसार, 1951 में यहां आदिवासी आबादी 44.67 प्रतिशत थी, जो 2011 में घटकर 28.11 प्रतिशत रह गई.

 

मरांडी ने पाकुड़ में आदिवासी जमीनों पर कब्जे का भी आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि आदिवासी कल्याण समिति की ओर से सरकार और केंद्र को भेजे गए पत्र में पाकुड़ के कई इलाकों में फर्जी दान पत्र के जरिए आदिवासी जमीन पर कब्जे की शिकायत की गई है. उन्होंने आरोप लगाया कि इन जमीनों पर इमारतें, कारखाने, मदरसे और मस्जिदें बनाई गई हैं. उन्होंने राज्य सरकार पर वोट बैंक की राजनीति के कारण इस मामले में कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया.

 

प्रेस वार्ता में उन्होंने मिशनरियों पर भी निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासियों को एक रैली में शामिल होने के लिए दबाव दिया जा रहा है. मरांडी ने दावा किया कि कुछ जगहों पर रैली में नहीं जाने पर जुर्माना लगाने की धमकी भी दी गई है.

 

परिसीमन को लेकर आदिवासी अधिकारों पर उठ रही चिंता के बीच बाबूलाल मरांडी ने कहा कि संविधान में आदिवासियों को मिले अधिकार सुरक्षित रहेंगे. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों से कोई छेड़छाड़ नहीं होने दी जाएगी. मरांडी ने आदिवासी समाज से कांग्रेस और मिशनरियों के बहकावे में नहीं आने की अपील की. 

 

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