Ranchi : झारखंड राज्य लोक सेवा आयोग के सदस्य जमाल अहमद ने बाबूलाल मरांडी द्वारा लगाये गये आरोपों को निराधार व राजनीति से प्रेरित बताया है. साथ ही यह भी कहा है कि उनके पास कोई अवैध चल या अचल संपत्ति नहीं है.
वह पांच दिनों के अंदर अपनी संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक करेंगे, ताकि पारदर्शिता बनी रहे. जमाल अहमद ने बाबूलाल मरांडी द्वारा लगाये गये आरोप के बाद जारी विज्ञप्ति में इन तथ्यों का उल्लेख किया है.
उन्होंने कहा है कि वह एक संवैधानिक पद पर है. इसलिए वह अब तक सार्वजनिक रूप से जवाब देने में संकोच करते रहे है. उनका मानना है कि संवैधानिक पदों की गरिमा शब्दों के बदले आचरण में होता है. लेकिन जब समाज मे भ्रम फैलाया जाये तो सच को जनता के सामने रखना उनका दायित्व है. उनके पास कोई अवैध संपत्ति नहीं है. पारदर्शिता बनाये रखने के लिए वह पांच दिनों में अपनी संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक करेंगे.
उन्होंने व्याख्याता नियुक्ति घोटाले की चर्चा करते हुए कहा है कि वह ना तो इस मामले में अभियुक्त हैं ना ही आरोपी. इस घोटाले की जांच में सीबीआई को जिनके खिलाफ साक्ष्य मिले हैं उनका नाम सार्वजनिक है. इसके बावजूद बिना किसी तथ्य और साक्ष्य के इस मामले में उनका नाम जोड़ना भ्रम फैलाने की कोशिश करना है.
बाबूलाल मरांडी द्वारा उनके शिक्षक होने का उल्लेख करने के मामले में उन्होंने कहा है कि उन्हें इस बात का गर्व है कि वह शिक्षक है. उन्होंने अपनी यात्रा प्राथमिक शिक्षक के रूप में की. बाबूलाल मरांडी भी प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक रहे हैं. इसलिए वह जानते हैं कि शिक्षक की सबसे बड़ी पूंजी उसका चरित्र, ईमानदारी और मर्यादा है. जमाल अहमद ने शिक्षक धर्म की गरिमा को राजनीति से ऊपर रखने की उम्मीद जतायी है.
जमाल अहमद ने अपनी ईमानदारी की चर्चा करते हुए कहा है कि उनकी पत्नी 1995-96 में विश्विद्यालय में इतिहास की टॉपर रही हैं. उन्होंने जेपीएसी में 2018 में आवेदन दिया था. इंटरव्यू के लिए बुलावा आया था, लेकिन वह इंटरव्यू के लिए नहीं गयीं.
उनके दोनों बेटे BIT से पढ़े हैं. लेकिन उनके बेटों ने कभी जेपीएसीसी दवारा आयोजित किसी परीक्षा में शामिल होने के लिए आवेदन नहीं दिया. वह इन तथ्यों को इसलिए सार्वजनिक कर रहे हैं ताकि समाज सच को जान सके.
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