Ranchi News: नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर पारसनाथ स्थित मरांग बुरु के दिशोम मांझीथान में पूजा के बाद दर्ज प्राथमिकी के मामले में स्थानीय आदिवासियों को प्रताड़ित किए जाने पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने मधुबन थाना कांड संख्या 13/24 की निष्पक्ष जांच और पांच ग्रामीणों को राहत देने की मांग की है.
मरांडी ने पत्र में कहा है कि 19 जुलाई 2024 को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना मुर्मू सोरेन ने जिला प्रशासन की मौजूदगी में दिशोम मांझीथान में पारंपरिक पूजा की थी. ग्रामीणों के अनुसार, इस दौरान नौ बकरे समर्पित किए गए थे, जिनमें एक की बलि नायके बाबा ने दी थी. शेष आठ बकरे गायब होने का आरोप भी लगाया गया है.
इसे भी पढ़ें -
उन्होंने बताया कि 24 जुलाई 2024 को प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी के आवेदन पर मधुबन थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी. इसमें पारसनाथ क्षेत्र में मांस-मदिरा निषेध और धार्मिक भावनाएं आहत होने का हवाला दिया गया था.
मरांडी ने सवाल उठाया कि जब पूजा मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन की मौजूदगी में हुई थी, तो पांच स्थानीय आदिवासियों को किस आधार पर आरोपी बनाया गया. उनका दावा है कि इनमें दो ग्रामीण घटना के समय मौके पर मौजूद भी नहीं थे, फिर भी उन्हें पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है.
उन्होंने मुख्यमंत्री से साहेबराम मुर्मू, फागु मरांडी, बुधन हेम्ब्रम, अर्जुन हेम्ब्रम और सिकन्दर हेम्ब्रम के खिलाफ कथित पुलिस प्रताड़ना रोकने की मांग की है. साथ ही पूरे मामले और आठ बकरे गायब होने के आरोपों की उच्चस्तरीय जांच कराने तथा दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करने को कहा है.
मरांडी ने मरांग बुरु में संथाल आदिवासियों की पारंपरिक पूजा पद्धति और सम्मेद शिखरजी से जुड़े नियमों पर सरकार से स्पष्ट नीति बनाने की भी मांग की है.
Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें.

