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प्रतिबंधित मांस कांड के पांच अभियुक्तों की जमानत याचिका खारिज

न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत ने प्रतिबंधित मांस कांड के पांच अभियुक्तों की जमानत याचिका रद्द कर दी है. अदालत ने जिन अभियुक्तों की जमानत याचिका रद्द की है, उसमें रफीक, नाजिम, साकिर अली, कादिर और नासिर कुरैशी का नाम शामिल है. सभी अभियुक्तों ने खुद को गरीब और निर्दोष बताते हुए पुलिस द्वारा गलत तरीके से मामले में फंसाने की दलील दी थी.
 

Ranchi :   न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत ने प्रतिबंधित मांस कांड के पांच अभियुक्तों की जमानत याचिका रद्द कर दी है. अदालत ने जिन अभियुक्तों की जमानत याचिका रद्द की है, उसमें रफीक, नाजिम, साकिर अली, कादिर और नासिर कुरैशी का नाम शामिल है. सभी अभियुक्तों ने खुद को गरीब और निर्दोष बताते हुए पुलिस द्वारा गलत तरीके से मामले में फंसाने की दलील दी थी.
 

 

प्रतिबंधित मांस कांड के इन पांच आरोपियों में से रफीक ने अपनी ओर से एक याचिका दायर की थी. जबकि बाकी चार अभियुक्तों ने एक साथ जमानत याचिका दायर की थी. रफीक की ओर से यह दलील दी गयी कि पुलिस द्वारा आजाद बस्ती में की गयी छापेमारी के दौरान वह वहां उपस्थित नहीं था. पुलिस ने सिर्फ उसके नाम पर निबंधित गाड़ी JH01DM 1776 पर मांस पाये जाने की वजह से उसे अभियुक्त बनाया है.वास्तव में उसका इस काम से कोई लेना देना नहीं है. वह गरीब आदमी है और अपनी रोजी रोटी कमाने के लिए अपनी गाड़ी ड्राइवर के सहारे किराये पर चलवाता है. अगर ड्राइवर ने कुछ गलत किया है तो इसमें उसका कोई दोष नहीं है.

 

नाजिम सहित अन्य तीन अभियुक्तों की ओर से यह दलील दी गयी कि वे सभी इस मामले में निर्दोष है. चारों अभियुक्त ना तो उन गाड़ियों के मालिक हैं, जिन गाड़ियों को प्रतिबंधित मांस के साथ पकड़ा गया है. पुलिस ने ना तो मांस को जब्त करने का कोई वीडियो दिया है और ना ही मांस की फॉरेंसिंक जांच करायी है. इसलिए यह कहना सही नहीं है कि पुलिस द्वारा जब्त किया गया मांस प्रतिबंधित है. पुलिस ने इस मामले में गलत तरीके से उन्हें फंसाया है.  इन तथ्यों को देखते हुए अभियुक्तों को जमानत पर रिहा करना चाहिए.

 

सरकार की ओर से दोनों ही जमानत याचिकाओं का विरोध किया गया.  सरकार की ओर से यह दलील दी गयी कि पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवई की. पुलिस कार्रवाई के दौरान वहां मौजूद लोग भागने लगे. इसमें से चार को दौड़ाकर पकड़ लिया गया. जबकि बाकी लोग भाग गये. अभियुक्तों के खिलाफ इस मामले में लिप्त रहने का सीधा आरोप है. पुलिस ने गाड़ियों से 32 क्विंटल मांस जब्त किया था. मामले में अभी जांच जारी है. यह गंभीर प्रकृति का मामला है. अभियुक्तों को जमानत पर रिहा करने से वे गवाहों को डरायेंगे और सबूतों को प्रभावित करेंगे. न्यायिक दंडाधिकारी ने सभी पक्षों की दलील सुनने के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए पांचों अभियुक्तों को जमानत देने से इनकार कर दिया.

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