Ranchi: जेपीएससी घेराव कार्यक्रम में भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के कार्यकर्ताओं ने पुलिस की बैरिकेडिंग को तोड़ दिया. जेपीएससी कार्यालय के गेट पर पहुंच गये. वहां पोस्टर लगा दिया. फिर कांग्रेस पार्टी के दफ्तर को घेरने पहुंच गये. लेकिन सरकारी निर्देश और रांची पुलिस के अधिकारियों व पुलिसकर्मियों की सूझबुझ ने भाजपा को बैकफुट पर ला दिया.
जैसा कि इनपुट था, भाजयुमो के कार्यकर्ता बैरिकेडिंग तोड़ेंगे, हंगामा व नारेबाजी करेंगे, तो पुलिस बल प्रयोग करेगी. और दिल्ली में छात्रों पर लाठी चार्ज की तुलना रांची में लाठी चार्ज से किया जायेगा. लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ. पुलिस ने संयम बरता. निश्चित तौर पर झारखंड की सत्ता भी यही चाहती होगी.
दरअसल, सत्ता शीर्ष यह समझता है कि गलती हुई है. गड़बड़ी हुई है. सरकार व पुलिस कार्रवाई कर रही है. इन सबके बाद भी युवाओं में आक्रोश है. उन्हें गुस्से का इजहार करने का हक व अधिकार भी है. भाजपा विपक्ष में है, तो वह इस आक्रोश का फायदा उठायेगी, इसमें कुछ भी गलत नहीं है. इसलिए सरकार के स्तर से यह साफ कर दिया गया कि युवाओं पर बल प्रयोग नहीं होगा. इससे युवा और आक्रोशित होंगे और फिर भाजपा आसानी से माहौल बदल देगा.

JPSC ऑफिस के बाहर पोस्टर लगाते भाजयुमो कार्यकर्ता
सरकार को इनपुट मिली थी कि गड़बड़ी की या करायी जा सकती है. इसलिए जेपीएससी के आसपास बड़ी संख्या में पुलिस की तैनाती की गई थी. ताकि बिना बल प्रयोग किये भी भाजयुमो कार्यकर्ताओं को काबू में किया जा सके. लेकिन जब पुलिस की तरफ से बल प्रयोग नहीं हुआ, तब आनन-फानन में भाजयुमो कार्यकर्ता कांग्रेस पार्टी के कार्यालय की तरफ बढ़ गये.
शहीद चौक के पास भाजयुमो व कांग्रेस के कार्यकर्ता जरूर आमने-सामने आये. एक-दूसरे पर अंडे व संतरे के छिलके फेंके. लेकिन कोई बड़ा उपद्रव नहीं हुआ. यह इसलिए क्योंकि रांची पुलिस ने वहां भी सुरक्षा के तगड़े इंतजाम कर दिये थे. और जवानों को संयम बरतने और किसी भी तरह के उकसावे पर ध्यान नहीं देने का निर्देश था.
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