हॉल का उद्घाटन, उचित मूल्य पर मिलेगी जीवन रक्षक दवाएं
चार कॉलेजों में कृषि विषय में अंडर ग्रैजुएट प्रोग्राम
जेसीइसीइबी की पहले काउंसिलिंग के बाद कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग कांके में कुल 6 तथा कॉलेज ऑफ हॉर्टिकल्चर खुंटपानी चाईबासा में 19 सीटें खाली रह गयी थीं. दूसरी काउंसिलिंग में आवंटित विद्यार्थियों का नामांकन कॉलेज में मंगलवार एवं बुधवार को होगा. राज्य के चार महाविद्यालयों में कृषि विषय पर अंडर ग्रेजुएट प्रोग्राम चलाये जाते हैं. रांची एग्रीकल्चर कॉलेज कांके, रविन्द्र नाथ टैगोर एग्रीकल्चर कॉलेज देवघर, तिलका मांझी एग्रीकल्चर कॉलेज गोड्डा एवं कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर गढ़वा में नामांकन कि प्रक्रिया बुधवार तक चलेगी. जेसीइसीइबी द्वारा निर्गत पत्र के आधार पर अभ्यर्थी अपना नामांकन करा सकेंगे.नामांकन से पूर्व अभ्यर्थियों के अभिलेखों की होगी जांच
अभ्यर्थी को दसवीं एवं बारहवीं पास होने का मार्क्सशीट एवं डिग्री सर्टिफिकेट, कॉलेज-स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट, चरित्र प्रमाण-पत्र, मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट सिविल सर्जन, सीएमओ द्वारा निर्गत, आरक्षित वर्ग हेतु जाति प्रमाण-पत्र, विद्यार्थी एवं अभिवावक का एंटीरैगिंग एफिडेविट एवं पासपोर्ट फोटो साथ लाना होगा. अभिलेख सत्यापन के समय सभी प्रमाण-पत्रों की मूल एवं छाया प्रति अनिवार्य रूप से साथ लानी होगी. नामांकन शुल्क का भुगतान एटीएम या ऑनलाइन माध्यम से ही होगा. नगद राशि स्वीकार नहीं की जायेगी. जेसीइसीइबी ने आवंटन पत्र में अभिलेखों एवं शुल्क संबंधी निर्देश का जिक्र किया है. इस सबंध में विश्वविद्यालय की वेबसाइट में भी जानकारी दी गयी है. विस्तृत जानकारी संबंधित कॉलेज के डीन या एसोसिएट डीन अथवा एसिस्टेंट रजिस्ट्रार से जानी जा सकती है.पहले चरण में 298 विद्यार्थियों ने कराया था नामांकन
बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, कृषि एवं संबद्ध विषयों के क्षेत्र में राज्य का एकमात्र अग्रणी उच्च शिक्षण संस्थान है. जेसीइसीइबी की पहली काउंसिलिंग के तहत विश्वविद्यालय में 9 जनवरी तक नामांकन की प्रक्रिया चली थी. पहले चरण में कुल 298 विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय के अंडर ग्रेजुएट प्रोग्राम में नामांकन कराया था. दूसरी काउंसिलिंग के बाद विश्वविद्यालय के विभिन्न कॉलेजों के कुल 163 सीटों पर नामांकन होना है. इसे भी पढ़ें – यहां">https://lagatar.in/it-is-a-belief-that-sorrow-goes-away-by-taking-a-bath-here/">यहांनहाने भर से दूर हो जाता है दुख, एसी है मान्यता [wpse_comments_template]

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