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गुरुजी स्टूडेंटस क्रेडिट कार्ड और मुख्यमंत्री शिक्षा प्रोत्साहन योजना के लाभ इस साल से मिलने लगेंगे : मंत्री

  • भाजपा-आजसू विधायकों के सदन से वाकआउट के बीच स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग और आईटी विभाग की अनुदान मांगें (बजट) सदन से पास
  • विपक्ष ने शिक्षा व्यवस्था पर खड़े किए सवाल, सत्ता पक्ष सहित अन्य विधायकों ने सरकार को दिये अहम सुझाव
Ranchi : भाजपा-आजसू विधायकों के वाकआउट के बीच हेमंत सरकार के तीन विभागों की अनुदान मांगें सदन से पास हो गयीं. सदन से स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की अनुदान मांग पारित हो गयी, जबकि उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग और आईटी विभाग की अनुदान मांगें गिलोटिन से पास हुए. शुक्रवार को भी भाजपा-आजसू विधायक सरकार का जवाब सुने बिना सदन से निकल गए. विभागों की अनुदान मांगों पर सरकार का पक्ष रखते हुए प्रभारी मंत्री आलमगीर आलम ने कहा कि सरकार की तीन महत्वपूर्ण योजनाओं का लाभ इस साल से मिलने लगेगा. उन्होंने कहा कि गुरुजी स्टूडेंटस क्रेडिट कार्ड योजना र्थिक रूप से कमजोर बच्चों के लिए है. जिनका नामांकन इंजीनियरिंग, मेडिकल एवं अन्य संस्थान में हुआ है, उनकी पढ़ाई के लिए सरकार गुरुजी स्टूडेंट्स क्रेडिट कार्ड के तहत 15 लाख रुपये तक लोन देगी. यह क्रेडिट चार पर्सेंट ब्याज पर दिया जायेगा, जिसे 15 साल में चुकाना होगा.

2500 रुपए छात्रवृत्ति भी दी जाये

उन्होंने कहा कि इसी तरह से मुख्यमंत्री शिक्षा प्रोत्साहन योजना के तहत राज्य के दसवीं पास 8000 बच्चों को इंजीनियरिंग, मेडिकल, मास-कम्युनिकेशन, फैशन डिजाइनिंग, होटल मैनेजमेंट, सीए या ईसीडब्ल्यू की कोचिंग नि:शुल्क करायी जाएगी. यह कोचिंग राष्ट्रीय संस्थानों या अन्य बड़ी कोचिंग संस्था जो झारखंड में अवस्थित हैं, उनमें दी जायेगी. बच्चों को रहने के लिए 2500 रुपए छात्रवृत्ति भी दी जायेगी. वहीं मुख्यमंत्री एकलव्य प्रशिक्षण योजना के तहत राज्य के वैसे अभ्यर्थी, जो यूपीएससी, जेपीएससी, बैंक पीओ, क्लर्क, रेलवे, एसएससी की प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, उन्हें प्रतिष्ठित संस्थानों में नि:शुल्क कोचिंग दिलायी जायेगी. इसमें 2500 रुपये छात्रवृत्ति दी जायेगी. पहले चरण में 27000 बच्चों को इसका लाभ मिलेगा.

ड्राप आउट बच्चों को फिर से स्कूल में लाया जाएगा

मंत्री ने कहा कि अनुदान मांग पर जिन सदस्यों ने जो अहम सुझाव दिए हैं, उनको भी सरकार गंभीरतापूर्वक अमल में लायेगी. उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने जिन स्कूलों को बंद किया है, यह सरकार उन्हें खोलेगी. साथ ही साथ ड्राप आउट बच्चों को फिर से स्कूल में लाया जाएगा. उन्होंने कहा कि हमारी सरकार 2025 तक साक्षरता दर 90 प्रतिशत तक लाने का पूरा प्रयास करेगी. साथ ही महिला साक्षरता दर को भी बढ़ाने का काम करेगी.

अनुदान मांग पर किस विधायक ने क्या कहा

टीचर जिस जिले के हैं, उनकी पोस्टिंग उसी जिले में हो : अमित कुमार यादव

निर्दलीय विधायक अमित कुमार यादव ने अनुदान मांग पर चर्चा के दौरान कहा कि पॉलिटेक्निक कॉलेज का भवन बनकर तैयार है. मगर अब तक इसे न तो हैंडओवर नहीं लिया गया है. न ही इसे शुरू किया गया है. इसे शुरू किया जाए. उन्होंने कहा कि झारखंड में अलग-अगल क्षेत्रों में भाषा अलग है. इसलिए सरकार यह यह प्रयास करे कि जो शिक्षक जिस जिले का है, उनकी पोस्टिंग उसी जिला में हो. ऐसा करने से शिक्षक और छात्रों के बीच तारतम्य बनेगा. दोनों एक दूसरे की भाषा समझ पाएंगे.

पति-पत्नी टीचर हैं तो उन्हें एक ही जिले में पोस्टिंग हो : विनोद सिंह

माले विधायक विनोद सिंह ने कहा कि सरकार कह रही है कि पारा टीचरों की समस्या का हल हो गया. झारखंड में पारा टीचरों की नियुक्ति 2005 में हुई. अधिकांश शिक्षक 15 साल से ऊपर अपनी सेवा दे चुके हैं. नयी नियमावली में सरकार कह रही है कि 10 साल की सेवा पूर्ण होने के बाद उन्हें लाभ दिया जाएगा. अब सवाल यह उठता है कि नियमावली लागू होने की तिथि से इसे जोड़ा जाएगा तो अधिकांश टीचर रिटायर हो जाएंगे. कैसे उन्हें लाभ मिलेगा. जो पारा टीचर 20 साल की सेवा पूरी कर चुके हैं और टेट पास हो चुके हैं, उन्हें सरकार नियमित करे. उन्होंने कहा कि पति-पत्नी अगर टीचर हैं, तो उनकी पोस्टिंग एक ही जिला में किया जाए. क्योंकि अलग-अगल जिलों में नियुक्ति से परिवार बिखर रहा है.

यह कैसी शिक्षा नीति है : प्रदीप यादव

विधायक प्रदीप यादव ने कहा कि हमारा देश कहां जा रहा है. नयी शिक्षा नीति के तहत अब एनसीईआरटी के सिलेबस में सरकार महाराणा प्रताप और गोडसे को बच्चों को पढ़ाएगी. महाराणा प्रताप के इर्द-गिर्द कौन थे और गोडसे कौन थे, यह कौन नहीं जानता है. आज साक्षरता दर 73 प्रतिशत पहुंच चुकी है. मगर जो निरक्षर हैं, वे निश्चित ही दुकानों में काम करते नजर आएंगे. आज भी हमारे देश और प्रदेश में क्वालिटी एजुकेशन की कमी है. उन्होंने कहा कि शिक्षा निदेशालय में आईएएस की पोस्टिंग बंद की जाए. क्योंकि ये लोग प्रशासनिक तरीके से फरमान जारी करते हैं. नया फरमान यह है कि सरकारी स्कूल सुबह 6.45 बजे से दो बजे तक चलेगा. इसमें 1 से 2 बजे खेल का समय रखा गया है. अब सोचिए कि क्या स्कूल में इनडोर स्टेडियम है. निश्चित ही बच्चे गर्मी धूप में खेलेंगे.

100 में 30 बच्चे हायर एजुकेशन के अभाव में स्कूल छोड़ देते हैं : शिल्पी नेहा तिर्की

कांग्रेस विधायक शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि सरकारी स्कूलों में नामांकन कराने वाले 100 में 30 बच्चे स्कूल छोड़ देते हैं. इसके पीछे क्या कारण है. क्योंकि यह बच्चे स्कूलिंग करने के बाद हायर एजुकेशन में नहीं जा पाते हैं. हम हिंदी-अंग्रेजी के विरोधी नहीं हैं. मगर जिस क्षेत्र स्कूल हैं, वहां के बच्चे को उनकी भाषा में अगर शिक्षा दी जाए तो बच्चे अच्छे ढंग से पढेंगे. उन्होंन गैर सरकारी सहायता प्राप्त होने के बावजूद अच्छे रिजल्ट देते हैं. मगर हम उन स्कूलों के साथ न्याय नहीं कर पा रहे हैं. उन्होंने कहा कि झारखंड का सबसे बड़ा विश्वविद्यालय मात्र तीन एकड़ में है, जबकि बनारस हिंदू विश्वविद्यालय 20 एकड़ में है. कहां से शैक्षणिक माहौल बन पाएगा.

क्षेत्रीय भाषा में बच्चों को पढ़ाया जाए : नीरा यादव

भाजपा विधायक नीरा यादव ने कहा कि वर्ग दो और तीन के बच्चों को उनके क्षेत्रीय भाषा में पढ़ायी करायी जानी चाहिए. कस्तूरबा विद्यालय के कई भवन बनकर तैयार हैं. मगर अब तक शिफ्ट नहीं किया जा रहा है. ड्राप आउट बच्चों को स्कूल वापस लाने में सरकार विफल रही है. स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है. ऐसे में कैसे बेहतर शिक्षा की परिकल्पना की जा सकती है.

पूर्ववर्ती रघुवर सरकार में शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर कार्य हुए : अनंत ओझा

भाजपा विधायक अंनत ओझा ने कहा कि पूर्ववती रघुवर सरकार में शिक्षा काे लेकर कई काम किए गए. मगर वर्तमान सरकार में शिक्षा को लेकर कोई उपलब्धि हासिल नहीं की. हमारी सरकार ने झारखंड आंदोलनकारी विनोद बिहारी महतो के नाम से विश्वविद्यालय की स्थापना की. तीन-तीन नए मेडिकल कॉलेज खोलने का काम किया. 90 हजार से अधिक शिक्षक के पद रिक्त हैं. एक भी नयी नियुक्ति नहीं हुई. कैसे सुधरेगी हमारी शिक्षा व्यवस्था.

भाजपा विधायक शशिभूषण मेहता हुए नाराज, अपना पेपर फाड़कर सदन से निकल गए

भाजपा विधायक शशिभूषण मेहता स्पीकर और अपने ही दल के सदस्य को ज्यादा समय देने से नाराज हो गए और बोलने के लिए लाए गए पेपर को फाड़कर सदन से निकल गए. इन्हें समझाने का प्रयास भाजपा विधायक दल के सचेतक बिरंची नारायण ने किया. मनीष जायसवाल ने भी समझाया. स्पीकर ने भी समझाया. मगर किसी की बात नहीं सुने. कहा कि एक आंख में काजल एक आंख में सूरमा वाली बात सदन में हो रही है. भाजपा को 26 मिनट दिया गया. जिसमें 23 मिनट सदस्य नीरा यादव ने ले लिया. अब 3 मिनट में हम क्या बोलेंगे. हम भी पढ़े लिखे हैं. शिक्षा के जानकार हैं. सारी तैयारी करके आए थे कि हम कुछ बोलेंगे. सरकार के शिक्षा बजट पर. मगर मुझे समय नहीं दिया गया. यह बहुत दुखद बात है. स्पीकर के बार-बार आग्रह के बावजूद और अपने दल के विधायकों को समझाने के बावजूद वे नहीं माने और सदन से निकल गए. इसे भी पढ़ें – झुमरी">https://lagatar.in/in-order-to-go-from-jhumri-tilaiya-to-ranchi-3-news-of-the-district-including-woman-missing-with-2-children/">झुमरी

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