NewDelhi/Kolkata : सुप्रीम कोर्ट द्वारा पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची अपडेट के लिए एक दिन की (सात अप्रैल तक) समयसीमा तय किये जाने की खबर है. साथ ही SC ने एसआईआर)न्यायाधिकरणों को दस्तावेजों को फिर से जांच करने का आदेश दिया है.
कोर्ट ने कहा कि न्यायाधिकरणों से अनुरोध किया गया है कि वे पूरी दस्तावेजी प्रक्रिया को फिर से जांच लें. इसमें न्यायिक अधिकारियों द्वारा दर्शाये गये कारण भी शामिल हैं. सभी तरह के संदेहों को दूर करने को कहा गया है. कोर्ट ने अनुरोध किया है कि सभी पक्षों की निष्पक्ष सुनवाई की जाये.
इससे पहले आज निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से हटाये गये लोगों के दावों और आपत्तियों पर न्यायिक अधिकारियों ने अब तक 59 लाख से अधिक मामलों का फैसला कर लिया है. आयोग ने कोर्ट से कहा कि बाकी बचे दावों और आपत्तियों पर दिन में फैसला किया जायेगा.
सभी मामलों का निपटारा समय पर कर दिया जायेगा. आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी कि शेष मतदाताओं की पूरक सूची आज रात प्रकाशित कर दी जायेगी. आयोग के दावे क आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस द्वारा भेजे गये पत्र का हवाला दिया,
इस पत्र में कहा गया है कि हटाये गये 60 लाख मतदाताओं के दावों पर लगातार काम जारी है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मालदा जिले में लगभग आठ लाख दावों का निपटारा हो चुका है.
कोर्ट ने संतोष जताते हुए आदेश दिया कि शेष मामलों का निपटारा भी जल्द पूरा होना चाहिए, बता दें कि मालदा में 1 अप्रैल को जजों को घेराव किया गया था.
सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर राज्य की प्रणाली काम करने में विफल होती है, तो हम देखेंगे कि क्या किया जा सकता है. कोर्ट ने न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा के मद्देनजर यह टिप्पणी की. इस क्रम में कोर्ट ने यह भी कहा कि केंद्रीय बलों को पश्चिम बंगाल से वापस नहीं बुलाया जायेगा.
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