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बेरमो : 76 साल की उम्र में 4 कि.मी पैदल चलकर बच्चों को पढ़ाने जाते हैं शिक्षक झब्बू लाल महतो

Anant Kumar Das Bermo : झब्बू लाल महतो शिक्षा के क्षेत्र में अलख जगाने के लिए भागीरथी प्रयास रूप में जाने जाते हैं. झब्बू लाल महतो बुनियादी शिक्षक के नाम से भी प्रसिद्ध हैं. वे बोकारो जिले के नावाडीह प्रखंड अंतर्गत कंजकीरो पंचायत के खेरागड्डा के रहने वाले हैं. इस इलाके में झब्बू लाल महतो के अथक प्रयास से ही शिक्षा के क्षेत्र में परिवर्तन हुए हैं. झब्बू लाल महतो 1982 में पिलपिलो ग्राम में खपरैल का घर बनाया और उसी घर में बच्चों को पढ़ाने की शुरुआत की. वे निरंतर बच्चों को पढ़ाने का काम करते रहे. इसे भी पढ़ें : आंदोलनकारी">https://lagatar.in/anti-social-elements-damaged-the-statue-of-agitator-virendra-bhagat-people-took-to-the-road/">आंदोलनकारी

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खपरैल का घर बनाकर बच्चों को दी शिक्षा

झब्बू लाल महतो जिस स्कूल में बच्चों को शिक्षा देते थे, 1989 में उसको सरकार ने अधिग्रहण कर लिया. वहां सरकारी शिक्षक की बहाली की गयी. लेकिन झब्बू लाल महतो मैट्रिक पास नहीं थे, जिसके कारण उनकी स्कूल में सरकारी शिक्षक के रूप में बहाली नहीं हो पायी. लेकिन शिक्षा के प्रति उनका ऐसा जुनून था कि उन्होंने बच्चों को पढ़ाना नहीं छोड़ा. वे बच्चों को फ्री में ही पढ़ाते रहें. बच्चे उन्हें 25 पैसे और 50 पैसे दक्षिणा के रूप में देते थे. उसी से उन का भरण पोषण होता था. इसे भी पढ़ें : शेयर">https://lagatar.in/flat-opening-of-stock-market-sensex-rises-264-points-nifty-crosses-17600/">शेयर

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खरपाल से बना घर परिवर्तित होकर बना हीरा उत्क्रमित मध्य विद्यालय

जब बच्चे पांचवे क्लास में पास होकर दूसरे स्कूल जाने लगते थे, तब उन्हें उपहार स्वरूप धोती और ज्योति दिया जाता था. धोती वोे अपने पहनने के लिए लेते थे. वहीं ज्योति बैलों को बांधकर खेती बारी के उपयोग में करते थे. यह सिलसिला लगातार चलता रहा और अब यह स्कूल हीरा उत्क्रमित मध्य विद्यालय के रूप में परिवर्तित है. यह विद्यालय कंजकीरो पंचायत के पिलपिलो में स्थापित है. इसे भी पढ़ें : सीबीए">https://lagatar.in/cba-organized-business-and-excellence-award-felicitated-entrepreneurs/">सीबीए

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76 साल की उम्र में 4 कि.मी पैदल चलकर जाते हैं पढ़ाने

झब्बू लाल महतो अपने घर से 4 किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल पहुंचते हैं. आज उनकी उम्र 76 वर्ष हो गयी है. इसके बाद भी बच्चों को शिक्षा देने का कार्य निरंतर जारी है. जब पारा टीचरों की बहाली हो रही थी, उस समय वहां शिक्षकों ने उन्हें आने से मना किया, लेकिन वे नहीं माने और स्कूल जाना जारी रखा. वो कहते हैं कि वह घर पर यूं ही बैठकर नहीं रह सकते हैं, उन्हें मन नहीं लगता है. उन्हें बच्चों को पढ़ाना अच्छा लगता है. इसलिए इस उम्र में भी वे स्कूल पहुंच जाते हैं और बच्चों को शिक्षा देते हैं. इसे भी पढ़ें : लखनऊ">https://lagatar.in/lucknow-huge-fire-broke-out-in-hotel-8-10-people-trapped-in-rooms-were-rescued-rescue-underway/">लखनऊ

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परिवार के 6-7 सदस्य हैं शिक्षक

झब्बू लाल महतो का एक बेटा विदेश के किसी कंपनी में काम करता है. वहीं उनका दूसरा बेटा पिपराडीह उत्क्रमित मध्य विद्यालय में सहायक अध्यापक के रूप में कार्यरत है. उनके परिवार में 6 से 7 सदस्य शिक्षक हैं जो शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रहे हैं. शिक्षा के प्रति लगाव और उनके निरंतर प्रयास के कारण ही उन्हें बुनियादी शिक्षक के रूप में जाने जाते हैं. इसे भी पढ़ें : कांग्रेस">https://lagatar.in/congresss-attack-mlas-returned-autonomy-of-panchayats/">कांग्रेस

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