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2015-22 के बीच रेलवे ने माइनिंग चालान के बदले तुलसियान के कहने पर की 251 रैक से पत्थरों की ढुलाई

Ranchi: भागलपुर पिरपैंती में तैनात रेल अधिकारियों ने माइनिंग चालान के बदले तुलसियान के मौखिक रुप से कहने पर ही रेलवे रैक से पत्थरों की ढुलाई की. तुलसियान बंधुओं का साहिबगंज में पत्थर का खदान है. तुलसियान बंधुओं ने बिना माइनिंग चालान के पत्थरों की ढुलाई कर राज्य सरकार को 11 करोड़ रुपये के अधिक का नुकसान पहुंचाया. प्रवर्तन निदेशालय ने तुलसियान बंधुओं के कारोबार के सिलसिले में जांच के दौरान इस बात की पुष्टि हुई है. साथ ही पिरपैंती में पदस्थापित रेल अधिकारियों ने पूछताछ के दौरान इसे स्वीकार किया है.
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  • - तुलसियान की कंपनी ने 2015-2022 तक की अवधि में 268 रैक के सहारे स्टोन चिप्स को दूसरे राज्यों में भेजा.

Ranchi: भागलपुर पिरपैंती में तैनात रेल अधिकारियों ने माइनिंग चालान के बदले तुलसियान के मौखिक रुप से कहने पर ही रेलवे रैक से पत्थरों की ढुलाई की. तुलसियान बंधुओं का साहिबगंज में पत्थर का खदान है. तुलसियान बंधुओं ने बिना माइनिंग चालान के पत्थरों की ढुलाई कर राज्य सरकार को 11 करोड़ रुपये के अधिक का नुकसान पहुंचाया. प्रवर्तन निदेशालय ने तुलसियान बंधुओं के कारोबार के सिलसिले में जांच के दौरान इस बात की पुष्टि हुई है. साथ ही पिरपैंती में पदस्थापित रेल अधिकारियों ने पूछताछ के दौरान इसे स्वीकार किया है.

 

ईडी ने जांच में पाया कि तुलसियान बंधुओं की सीटीएस और उससे जुड़ी कंपनियों के खिलाफ साहिबगंज, पिरपैंती और दिल्ली में प्राथमिकी दर्ज है. इसमें तुलसियान बंधुओं की कंपनी पर बिना माइनिंग चालान के ही रेल अधिकारियों के साथ साजिश रचकर रेलवे रैक के सहारे खनिजों (स्टोन चिप्स, बोल्डर) की ढुलाई का आरोप है. ईडी ने मामले की जांच के लिए सभी प्राथमिकी के आधार पर ईसीआईआर दर्ज की थी.

 

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तुलसियान बंधुओं के खिलाफ जांच के दौरान पाया गया कि साहिबगंज में मेसर्स सीटीएस इंडस्ट्रीज लिमिटेड का माइनिंग क्षेत्र जोकुमारी, महादेवगंज और साहिबगंज के प्लॉट नंबर 63,71,72 पर फैला हुआ है. तुलसियान बंधुओं द्वारा साहिबगंज में माइनिंग के बाद स्टोन चिप्स, बोल्डर को भागलपुर जिले के पिरपैंती से रेलवे रैक के सहारे बाहर भेजा जाता है.

 

रेलवे से जुड़े दस्तावेज की जांच में पाया गया कि इस कंपनी ने 2015-2022 तक की अवधि में 268 रैक के सहारे स्टोन चिप्स को दूसरे राज्यों में भेजा है. लेकिन 268 रैक के पत्थरों की ढुलाई में सिर्फ 17 रैक के लिए माइनिंग चालान का इस्तेमाल किया है. बाकी 251 रैक पत्थरों की ढुलाई के लिए माइनिंग चालान नहीं दिया. रेल अधिकारियों ने नियमों का उल्लंघन कर 251 में से 66 रैक की पत्थरों की ढुलाई बगैर किसी दस्तावेज के ही की.

 

ईडी ने जांच के दौरान सीटीएस में काम करने वालों के अलावा रेल अधिकारियों से पूछताछ की. सीटीएस के कर्मचारी ने ईडी को दिये गये अपने बयान में यह स्वीकार किया कि औसतन प्रति दिन क्रशर पर 80-85 हाईवा में स्टोन चिप्स भरा जाता है. लेकिन मालिक के निर्देश पर कुछ का चालान बनता है. बाकी का कच्चा हिसाब-किताब रखा जाता है. दूसरे दिन मालिक (अशोक तुलसियान, सिद्धार्थ तुलसियान) के निर्देश पर कच्चे हिसाब किताब को जला दिया जाता है.

 

मालदा के सीनियर डिविजनल कॉमर्शियल मैनेजर ने पूछताछ के दौरान ईडी को रैक से खनिजों की ढुलाई की विस्तृत जानकारी दी. साथ ही इससे संबंधित रेल मंत्रालय द्वारा जारी आदेश की प्रतिलिपि दी. पिरपैंती के कॉमर्शियल सुपरवाइजर कॉर्निलियस मरांडी ने भी पूछताछ के दौरान बिना दस्तावेज के पत्थरों की ढुलाई को गलत माना. रेल रैक से संबंधित कुछ दस्तावेज पर चालान के कॉलम में बयान (Statement) लिखे होने के मामले में मरांडी से पूछताछ की गयी. मरांडी ने इस मामले में यह स्वीकार किया कि पत्थरों की ढुलाई के लिए चालान नहीं देने की स्थिति में रैक बुक करने वालों का बयान (मौखिक बात) दर्ज किया गया. उसने यह भी स्वीकार किया कि चालान के बदले बयान के आधार पर पत्थरों की ढुलाई गलत है.

 

तुलसियान बंधुओं द्वारा बुक किये गये रेल रैक का ब्योरा

कंपनी का नाम  रैक  बिना चालान
सीटीएस इंडस्ट्रीज  16  16
सीटीएस इंडस्ट्रीज  01 01
सीटीएस,एडीजीटी  31  31
सीटीएस,एडीजीटी  117  117
सीटीएस, SVEY 68  68
सीटीएस, इको फ्रेंडली 21  13
इको फ्रेंडली  14  05

 

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