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Jharkhand News: मगही-भोजपुरी व SC मुद्दों पर चुप्पी क्यों? वित्त मंत्री ने अपनी ही पार्टी के प्रदेश नेतृत्व को घेरा

झारखंड के वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने कांग्रेस नेता के राजू को पत्र लिखकर झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यशैली और नेतृत्व पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने पत्र में संगठन की निष्क्रियता और कई अहम मुद्दों पर चुप्पी को लेकर नाराजगी जताई है.
 

Ranchi : झारखंड के वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने कांग्रेस नेता के राजू को पत्र लिखकर झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यशैली और नेतृत्व पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने पत्र में संगठन की निष्क्रियता और कई अहम मुद्दों पर चुप्पी को लेकर नाराजगी जताई है.

 

राधा कृष्ण किशोर ने लिखा कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्यों की संख्या 314 से बढ़ाकर 628 कर देने से भी कोई फर्क नहीं पड़ेगा, अगर पार्टी राज्य के स्थानीय मुद्दों पर सक्रिय नहीं होती है. उन्होंने कहा कि संगठन का विस्तार तभी सार्थक है जब जमीनी मुद्दों पर काम हो.

 

पत्र में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक का भी जिक्र किया गया है. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के स्टैंड के बावजूद झारखंड प्रदेश कांग्रेस इसे भाजपा के खिलाफ बड़ा मुद्दा बनाने में असफल रही है. केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस करने से महिलाओं तक सही संदेश नहीं पहुंच रहा है.

 

भाषा विवाद को लेकर उन्होंने सवाल उठाया कि पलामू, गढ़वा, चतरा, कोडरमा, गिरिडीह, गोड्डा, धनबाद और बोकारो जैसे जिलों में बोली जाने वाली मगही और भोजपुरी भाषाओं को JTET से हटाने के मुद्दे पर प्रदेश नेतृत्व चुप क्यों रहा.

 

अनुसूचित जाति के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि राज्य में करीब 50 लाख SC आबादी है. इसके बावजूद बजट 2025-26 में अनुसूचित जाति परामर्शदात्री परिषद और आयोग को पुनर्जीवित करने की मांग पर भी कोई ठोस पहल नहीं दिखी.

 

राधा कृष्ण किशोर ने हजारीबाग के विष्णुगढ़ में नाबालिग के साथ दुष्कर्म और जिले में तीन अल्पसंख्यकों की हत्या की घटनाओं का जिक्र करते हुए प्रदेश नेतृत्व की भूमिका पर सवाल उठाया. उन्होंने पूछा कि इन घटनाओं के दौरान संगठन की सक्रियता क्यों नहीं दिखी.

 

उन्होंने संगठन में सामाजिक न्याय और परिवारवाद पर भी सवाल उठाए. उन्होंने मांग की कि प्रदेश कमेटी में दलित, पिछड़ा, आदिवासी, अल्पसंख्यक और सामान्य वर्ग के प्रतिनिधित्व की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाए. साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि नेताओं के परिवारों को संगठन में कितनी जगह दी गई है.

 

पत्र के अंत में उन्होंने कहा कि पार्टी के हित में मुद्दे उठाना अनुशासनहीनता नहीं है. उन्होंने स्पष्ट किया कि जो व्यक्ति पार्टी की नीतियों और सिद्धांतों के खिलाफ जाता है, उसी पर कार्रवाई होनी चाहिए. अंत में उन्होंने लिखा कि एक को साधिए, झारखंड कांग्रेस में सब सध जाएगा.

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