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झारखंड में सांप और कुत्तों से रहें सावधान

  • साल भर में डॉग बाइट के 14438 और सर्प दंश के 1162 केस
  • हर साल कुत्ता काटने से होती है 50 लोगों की मौत
  • दस हजार में सिर्फ 72 लोगों के पास ही है कुत्ता पालने का लाइसेंस
  • टायफाइड और मलेरिया के भी बढ़े रोगी
Ranchi : झारखंड में रहना है तो सांप और कुत्तों से सावधान रहें. हर जिले में सांप और कुत्तों ने आतंक मचा रखा है. साल भर में राज्य के सरकारी अस्पतालों में कुत्ता काटने के 14,438 केस आए. स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार (वित्तीय वर्ष 2023-24) झारखंड में कुत्ता काटने से सालाना 50 लोगों की मौत हो जाती है. वहीं सर्प दंश से सालाना 15 लोगों की मौत होती है. इस वित्तीय वर्ष में सरकारी अस्पतालों में सर्प दंश के 1162 मरीज आए. कुत्तों के आतंक का मामला विधानसभा में भी उठा था. सदन में आवारा कुत्तों से निपटने के लिए डॉग स्क्वायड की मांग की गई थी. बताते चलें कि दस हजार में सिर्फ 72 लोगों के पास ही कुत्ता पालने का लाइसेंस है. नगर निगम का दावा है कि रांची नगर निगम क्षेत्र में आवारा कुत्तों पर नियंत्रण के लिए मेसर्स होप एंड एनिमल ट्रस्ट अभियान चला रहा है. प्रतिदिन 10-15 कुत्तों का बंध्याकरण व टीकाकरण किया जा रहा है. चास नगर निगम क्षेत्र में भी इसी तरह की कार्रवाई की जा रही है. गिरिडीह, धनबाद व देवघर नगर निगम में नामित सोसाइटी से आवारा कुत्तों का बंध्याकरण व वैक्सिनेशन किया जा रहा है. जमशेदपुर, हजारीबाग व आदित्यपुर नगर निगम क्षेत्र में एजेंसी के चयन की प्रक्रिया चल रही है.

शहरी क्षेत्र में मौजूद आवारा कुत्तों का कोई डाटा उपलब्ध नहीं

रांची में आवारा कुत्तों का आतंक दिनों दिन बढ़ता जा रहा है. सदर अस्पताल में प्रतिदिन आवारा कुत्तों के काटने से संबंधित लगभग 200 मामले आ रहे हैं. एंटी रैबीज काउंटर पर भी प्रतिदिन टीकाकरण कराने वालों की लंबी लाइन लग रही है. बताते चलें कि 2013 में राजधानी में पायलट प्रोजेक्ट के तहत रांची नगर निगम ने होप एंड एनिमल ट्रस्ट को कुत्तों के बंध्याकरण व टीकाकरण की जिम्मेदारी दी थी. हालांकि, नगर निगम के पास शहरी क्षेत्र में मौजूद आवारा कुत्तों का कोई डाटा उपलब्ध नहीं है. पिछले दस सालों में ट्रस्ट की ओर से एक लाख चार हजार आवारा कुत्तों का बंध्याकरण किया गया है.

टायफाइड और मलेरिया के मरीज भी बढ़े

राज्य में टायफाइड और मलेरिया के मरीजों की संख्या में भी वृद्धि हुई है. वित्तीय वर्ष 2023-24 में राज्य सरकारी अस्पतालों में टायफाइड के 9,871 मामले आए. वहीं मलेरिया के 23,479 मरीजों की जांच की गई. डेंगू के 2,686, डिप्थेरिया के 09, चिकनगुनिया के 11, मिसल्स के 81 मरीजों की जांच की गई.

राज्य के सरकारी अस्पतालों में किस रोग के कितने मरीज

बीमारी                       मरीजों की संख्या डायरिया-                       2742 एनक्फैलेटिक्स                   04 डॉग बाइट                    14438 सर्प दंश                        1162 इंफ्लूएंजा                      5886 चिकनपॉक्स                    116 चिकनगुनिया                     11 डेंगू                            2686 फीवर विथ रस            2113 मलेरिया                    23479 मिसल्स                         81 रिस्प्यूरिटरी इंफेकेशन  460 टायफाइड                 9871 इसे भी पढ़ें : गठबंधन">https://lagatar.in/ruckus-in-alliance-congress-has-less-seats-in-the-assembly-but-is-showing-the-power-to-get-lok-sabha-elections/">गठबंधन

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