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2018 में जेल से हुआ था रिहा
माओवादियों के शीर्ष बुद्धिजीवियों में से एक और अंतरराष्ट्रीय माओवादी संगठन रीम व कम्पोसा के संस्थापकों में शामिल विजय कुमार आर्य को मजबूरी में जेल से रिहा करना पड़ा था. हालांकि बिहार सरकार ने विजय को जेल में बंद रखने की कई कवायद की थी. यहां तक कि लंबे समय तक बिहार सरकार ने आंध्र प्रदेश में चल रहे एक मामले में विजय आर्य को प्रोड्यूस नहीं किया था, ताकि न तो मामला खत्म हो और न ही वे रिहा हो सकें. परंतु एक के बाद एक कानूनी लड़ाईयां जीतने के बाद विजय आर्य बीते 13 सितंबर 2018 को रिहा हो गये थे. उन्हें बिहार के सासाराम जेल से रिहा किया गया था.14 मामले में कोई सबूत नहीं मिले थे
विजय आर्य के खिलाफ कुल 14 मामले दर्ज थे. सरकार की नजर में विजय आर्य,इतने बड़े नक्सली नेता थे कि उनकी गिरफ्तारी के लिए 30 लाख रुपए इनाम की घोषणा की गयी थी. गिरफ्तारी के बाद पुलिस पर दबाव इस कदर था कि पुलिस उन्हें सड़क मार्ग से ले जाने से बचती थी, लेकिन इन सबके बावजूद सरकार उनके खिलाफ एक भी मामले में सबूत अदालत में पेश नहीं कर सकी. करीब 7 वर्ष 4 महीने के बाद उन्हें साल 2018 में जेल रिहाई मिली थी. इसे भी पढ़ें –पीड़ित">https://lagatar.in/trend-you-are-seeing-making-victim-an-accused-tomorrow-you-will-also-be-a-victim-of-it/">पीड़ितको आरोपी बनाने का यह जो ट्रेंड आप देख रहे हैं, कल आप भी इसके शिकार होंगे [wpse_comments_template]

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