Ranchi : झारखंड की जेलों की निगरानी व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को मॉडल प्रिजन मैनुअल, 2016 के अनुरूप प्रत्येक जिले में 'बोर्ड ऑफ विजिटर्स' (BoV) का गठन करने का निर्देश दिया है. इस आदेश का पालन झारखंड सरकार को भी करना होगा.
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की खंडपीठ ने जेलों में जाति, लिंग, दिव्यांगता समेत अन्य आधारों पर भेदभाव से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया. अदालत ने कहा कि प्रत्येक जिले में गठित होने वाले बोर्ड की अध्यक्षता संबंधित प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश करेंगे.
सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. एस. मुरलीधर ने अदालत को बताया कि अब तक किसी भी राज्य या केंद्रशासित प्रदेश में जिला स्तर पर बोर्ड ऑफ विजिटर्स का गठन नहीं किया गया है. उन्होंने कहा कि मॉडल प्रिजन मैनुअल के अनुसार यह बोर्ड जेलों की बाहरी निगरानी का महत्वपूर्ण तंत्र है और नियमित निरीक्षण के माध्यम से बंदियों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है.
सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड समेत सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को जेल नियमों में मौजूद आपत्तिजनक प्रावधानों में किए गए संशोधनों की स्थिति रिपोर्ट भी दाखिल करने का निर्देश दिया है. साथ ही अदालत ने सभी राज्यों को 3 सितंबर 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है. मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर 2026 को होगी.
सुप्रीम कोर्ट के इस निर्देश के बाद झारखंड सरकार को राज्य के सभी जिलों में बोर्ड ऑफ विजिटर्स का गठन करना होगा. माना जा रहा है कि इससे राज्य की जेलों में निगरानी व्यवस्था मजबूत होगी, नियमित निरीक्षण सुनिश्चित होगा और बंदियों के अधिकारों की बेहतर सुरक्षा हो सकेगी.
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