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बोकारो : विभागीय गलती से बेघर हुए बरसात में बोकारो के 11 परिवार

Bokaro : तत्कालीन बिहार सरकार में आवासीय बोर्ड द्वारा वर्ष 1980 के दशक में बोकारो सहित अन्य शहरों में हाउसिंग कॉलोनी का निर्माण कराया गया था. बोर्ड ने अपने उद्देश्य की पूर्ति के लिए बोकारो के बालीडीह क्षेत्र को शहरीकरण को बढ़ावा देने के लिए मकान तथा फ्लैट बनाए गए थे. जिसमें एलआईजी फ्लैट के 12 ब्लॉक सहित 144 फ्लैट तैयार किए गए, वहीं एमआइजी के 50 मकान बनाए गए. बिक्री के लिए आवेदन लेने के बाद एमआइजी के 11 तथा एलआईजी के 30 फ्लैट आवंटित कर दिए गए. बोर्ड के अधिकारियों तथा जनता की लापरवाही के कारण बोर्ड द्वारा निर्धारित रकम पूरी जमा नहीं हो सकी.  फिर विभाग भी समय के साथ सुस्त होता गया. बाद में फ्लैट की बिक्री बंद होता देख विभाग ने रेंट के लिए आवेदन मांगा. 15 लोगों ने रेंट पर फ्लैट लिया लेकिन यह भी पूरी नहीं हो सकी.  इसे भी पढ़ें- जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-sexual-abuse-on-the-pretext-of-marriage-in-burmaine/">जमशेदपुर

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सरकार को राजस्व भी मिलेगा और हमें राहत- महेश सिंह

वर्ष 2006 में आवंटन की प्रक्रिया अधर में रहने पर  रेंट पर देने की बात कही थी लेकिन विभाग तैयार नहीं हुआ. बाद में सभी चीजों पर विराम लगा दिया गया. वहीं के रहने वाले महेश सिंह ने बताया कि हम 1980 से यहां रह रहे हैं विभाग ने भवन तो बना दिया लेकिन बिजली और ना ही पानी का कनेक्शन दिया.  समय के साथ खिड़की दरवाजे चोरी हो गए, संसाधन चोरी नहीं हो इसके लिए कई को मुफ्त में यह कह कर रहने दिया गया कि जब बिक्री होगी तब हट जाना होगा. आज तक कई परिवार इसी प्रकार रह रहे हैं. बृजमोहन सिंह ने कहा कि इन घरों की हालत देख कर कौन 10 से 12 लाख रुपए लगाएगा. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से आशा और निवेदन है कि जर्जर हो चुकी बिल्डिंग में वर्षों से रह रहे लोगों को रेंट पर नियमित कर दें. इससे सरकार को राजस्व भी मिलेगा और हमें राहत भी मिलेगी. इसे भी पढ़ें-जुगजुग">https://lagatar.in/ranchi-court-refuses-to-ban-the-release-of-jugjug-jio-the-decision-given-after-watching-the-film/">जुगजुग

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सीएम हेमंत सोरेन से गुहार

यहां रहने वालीं महिलाओं ने कहा कि हम सभी को यहां रहते रहते 30 साल से 40 वर्ष हो गए. यहीं से हमारे कई बच्चे पढ़ लिखकर सरकारी नौकरी भी कर रहे हैं. कोई देश की सेवा कर रहा है तो कोई इंजीनियर है. इतना ही नहीं लोगों का कहना है कि इसी पते पर हमारा आधार, कार्ड पैन कार्ड, बैंक खाते और अन्य डाक्यूमेंट्स भी आते हैं. सभी ने बिजली कनेक्शन भी झारखंड सरकार से लिया है तथा पानी पीएचडी विभाग से लिया. वहां रह रहे लोगों ने कहा कि अब हमें यह डर सता रहा है कि कहीं हमें बेघर न कर दिया जाए. लोग सीएम हेमंत सोरेन से गुहार लगा रहे हैं कि उन्हें यह हाउसिंग बोर्ड का आवास रेंट पर दे दें या फिर उन्हें उचित मूल्य लगाकर रहने वाले लोगों को बेच दिया जाये. इसे भी पढ़ें-जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-police-took-akshay-naveen-on-remand-in-manpreet-murder-case/">जमशेदपुर

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