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बोकारो : नेत्रहीन हिमांशु ने 10वीं में लाया 90 फीसदी अंक, मां ने सरकार से लगायी मदद की गुहार

Bokaro : बोकारो के कुर्मीडीह में रहने वाले हिमांशु रंजन की आंखों में रोशनी नहीं है. लेकिन हिमांशु का हौसले कभी कम नहीं हुआ. उसमें सफलता की डगर चूमने का साहस है. आंखों की रौशनी नहीं होने के बाद भी हिमांशु ने राइटर की मदद से जैक बोर्ड से 10वीं की परीक्षा दी और 90 प्रतिशत अंक लाकर मिसाल कायम किया. हिमांशु ने ब्रेन लिपि और यूट्यूब की मदद से पढ़कर यह मुकाम हासिल किया है. (पढ़ें, झारखंड">https://lagatar.in/monsoon-weakened-in-jharkhand-rain-fell-47-percent-less-than-normal-know-where-it-rained/">झारखंड

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आईएएस बनना चाहता हैं हिमांशु

हिमांशु की मां ने बताया कि उसने हिंदी में 88, इंग्लिश में 93, म्यूजिक में 97, होम साइंस में 83 सोशल साइंस में 89 और संस्कृत में 68 अंक आये हैं. उसकी मां ने बताया कि हिमांशु सिविल सर्विसेज की परीक्षा क्रैक कर आईएएस बनना चाहता है. हिमांशु की मां अपने बेटे के भविष्य को लेकर चिंतित है. उन्होंने राज्य सरकार और शिक्षा मंत्री से बेटे की आगे की पढ़ाई के लिए सहायता मांगी रही है. इसे भी पढ़ें : सैकड़ों">https://lagatar.in/hundreds-of-candidates-reached-morhabadi-maidan-demanding-employment-from-the-government/">सैकड़ों

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2015 में पहली और 2019 में दूसरी आंख की चली गयी रोशनी

बता दें कि 2015 से पहले हिमांशु सामान्य बच्चों की तरह निजी स्कूल में पढ़ाई कर रहा था. लेकिन अचानक उसके एक आंख की रोशनी चली गयी .पिता ने लाखों खर्च कर उसका इलाज कराया. फिर भी उसकी आंख की रौशनी वापस नहीं आयी. फिर 2019 में हिमांशु की दूसरी आंख की भी रौशनी छीन गयी. लेकिन उसने कभी हार नहीं माना. हिमांशु की मेहनत और जज्बे को सलाम है. इसे भी पढ़ें : BIG">https://lagatar.in/big-breaking-ranchi-police-uncovered-double-murder-within-22-hours-main-accused-arrested/">BIG

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आशा लता केंद्र में हिमांशु ने सिखी ब्रेल लिपि

हिमांशु रंजन के पिता विजय कुमार विश्वकर्मा स्टूडियो चलाते हैं. जबकि मां रागिनी विश्वकर्मा सिलाई केंद्र चलाती है. पिता ने बताया कि जब हिमांशु की आंख की रोशनी पूरी तरह चली गयी तो उसने कहा कि वह इसको लेकर चिंतित ना हो. वो आगे भी इसकी तरह पढ़ाई करेगा. उसके बाद बोकारो के सेक्टर 5 स्थित आशा लता केंद्र में उसका नामांकन कराया गया. जहां शिक्षकों ने ब्रेल लिपि उस को सिखाने का काम किया. कुर्मीडीह की रहने वाली सोनाली कुमारी जो नौवीं की छात्रा है, उसने उसके साथ राइटर की भूमिका निभाई. सोनाली हिमांशु को प्रश्न पढ़कर सुनाती थी और हिमांशु उससे उसका उत्तर बताता था जो वह लिखने का काम करती थी. इसे भी पढ़ें : नए">https://lagatar.in/9500-kg-ashoka-pillar-installed-on-the-roof-of-the-new-parliament-house-modi-unveiled/">नए

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