Bokaro : बोकारो के डिस्ट्रिक्ट">https://bokaro.nic.in/notice/district-minerals-foundation-trust/">डिस्ट्रिक्ट
मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) में गड़बड़ी का मामला सामने आया है. बता दें कि बोकारो स्टील प्लांट टाउनशिप में 1.08 करोड़ की लागत से 24 ओपन जिम बनाये गये थे. प्रधान महालेखाकार (CAG) ने इसको गलत बताते हुए आपत्ति जतायी है. उनका कहना है कि मिनरल डेवलपमेंट फंड के पैसे से जिम नहीं बनाया जा सकता है. ऐसे में इस फंड का गलत इस्तेमाल किया गया है. महालेखाकार ने फंड की रिकवरी करने आदेश दिया है. हालांकि कोई अधिकारी इस मामले में बोलने के लिए तैयार नहीं है. (बोकारो">https://lagatar.in/category/jharkhand/coal-area/bokaro/">बोकारो
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मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) में गड़बड़ी का मामला सामने आया है. बता दें कि बोकारो स्टील प्लांट टाउनशिप में 1.08 करोड़ की लागत से 24 ओपन जिम बनाये गये थे. प्रधान महालेखाकार (CAG) ने इसको गलत बताते हुए आपत्ति जतायी है. उनका कहना है कि मिनरल डेवलपमेंट फंड के पैसे से जिम नहीं बनाया जा सकता है. ऐसे में इस फंड का गलत इस्तेमाल किया गया है. महालेखाकार ने फंड की रिकवरी करने आदेश दिया है. हालांकि कोई अधिकारी इस मामले में बोलने के लिए तैयार नहीं है. (बोकारो">https://lagatar.in/category/jharkhand/coal-area/bokaro/">बोकारो
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मिनरल डेवलपमेंट फंड से नहीं बनाया जा सकता है जिम
बता दें कि टेंडर के निपटारे के बाद तीन महीने (नवंबर 2019 से जनवरी 2020) में ही 24 ओपन जिम बना दिये गये. एक महीने बाद यानी फरवरी 2020 को जिले के उपायुक्त ने इस योजना के पूरा होने पर योजना को स्वीकृति दे दी. लेकिन प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना के दिशा निर्देश के तहत स्वास्थ्य के नाम पर जिम नहीं बनाये जा सकते हैं. इसीलिए महालेखाकार ने ऐसा करने वालों से पैसा वसूलने की अनुशंसा की गयी है. इसे भी पढ़े : IAS">https://lagatar.in/ed-raids-the-whereabouts-of-abhijit-sen-a-close-aide-of-ias-pooja-singhal/">IASपूजा सिंघल के करीबी अभिजीत सेन के ठिकाने पर ईडी की छापेमारी
बोकारो में बनाये गये ओपन जिम पूरी तरह से उजड़ चुके
स्थानीय संदीप कुमार व मोहम्मद वकील का कहना है कि यह राशि के दुरुपयोग का मामला है. आरोप लगाया कि अधिकारियों ने अपनी जेब भरने का काम किया है. जहां ओपन जिम लगने चाहिए थे, वहां नहीं लगाये गये. जिस कारण आज ओपन जिम पूरी तरह से उजड़ चुके हैं. देखरेख के अभाव के कारण इस तरह की स्थिति उत्पन्न हुई है. यह राशि तत्कालीन उपायुक्त मुकेश कुमार के कार्यकाल में खर्च हुई थी. अब देखना यह है कि इस घोटाले में राशि की वसूली होती हैं या नहीं? यह सरकारी राशि की बंदरबाट का मामला है. इसे भी पढ़े : क्रिप्टो">https://lagatar.in/earthquake-in-crypto-market-investors-lost-830-billion-in-6-weeks/">क्रिप्टोमार्केट में भूचाल, 6 सप्ताह में निवेशकों को लगा 830 अरब डॉलर का चूना [wpse_comments_template]
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