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Bokaro Forest Land Scam :  उमायुष मल्टीकॉम द्वारा खरीदी गयी तेतुलिया की 74 एकड़ जमीन वन भूमि साबित

प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज, बोकारो ने तेतुलिया की 74 एकड़ जमीन पर उमायुष मल्टीकॉम के नाम कायम जमाबंदी को रद्द करने का आदेश दिया है. न्यायालय ने अपने फैसले में कहा है कि इस जमीन पर फर्जी दस्तावेज के सहारे मालिकाना हक कायम किया गया है.
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Ranchi :  प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज, बोकारो ने तेतुलिया की 74 एकड़ जमीन पर उमायुष मल्टीकॉम के नाम कायम जमाबंदी को रद्द करने का आदेश दिया है. न्यायालय ने अपने फैसले में कहा है कि इस जमीन पर फर्जी दस्तावेज के सहारे मालिकाना हक कायम किया गया है. जमीन संरक्षित वनभूमि है और वन विभाग के पास इसका मालिकाना हक है. न्यायालय ने बोकारो वन प्रमंडल पदाधिकारी द्वारा सेटलमेंट ऑफिसर के फैसले के खिलाफ दायर अपील की सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया है.

 

सेटलमेंट ऑफिसर ने  Suit No-4330/2013 की सुनवाई के बाद अपने फैसले में तेतुलिया की जमीन पर बोकारो स्टील प्रोजेक्ट का नाम हटाकर उमायुष मल्टीकॉम का नाम शामिल करने का आदेश दिया था. साथ ही जमीन की प्रकृति (जंगल साल) को बदलने का आदेश दिया था. इस आदेश के आलोक में जमीन की प्रकृति बदल दी गयी थी. साथ ही उमायुष मल्टीकॉम के नाम पर जमाबंदी कायम कर दी गयी थी.

 

सेटलमेंट ऑफिसर द्वारा मार्च 2022 में पारित इस आदेश के खिलाफ वन प्रमंडल पदाधिकारी ने प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज के कोर्ट में अपील दायर की थी. मामले की सुनवाई के दौरान अधिवक्ता डॉक्टर राज कुमार लाल ने वन विभाग का पक्ष रखा. मामले में राज्य सरकार, महेंद्र मिश्रा, इजहार अंसारी, उमायुष मल्टीकॉम और बोकारो स्टील प्लांट को प्रतिवादी बनाया गया था. न्यायालय ने सभी पक्षों को सुनने के बाद पांच मई को अपना फैसला सुनाया.

 

अदालत ने अपने फैसले में कहा है कि दस्तावेज में जालसाजी कर सेटलमेंट ऑफिसर के कोर्ट से पक्ष में आदेश हासिल किया गया. 10 डिसमिल जमीन पर दावे के लिए दायर एक मुकदमे को सेटलमेंट ऑफिसर के कोर्ट द्वारा खारिज किया जा चुका था. खारिज किये जा चुके इस मुकदमे को गलत तरीके से फिर से शुरू किया गया. साथ ही आवश्यक प्रक्रिया पूरा किये बिना ही इसे 103 एकड़ के दावे के लिए विस्तारित कर दिया गया.

 

इसके बाद 1933 में पश्चिम बंगाल के पुरूलिया जिले से नीलामी में जमीन खरीदने के दस्तावेज के आधार पर जमीन का म्यूटेशन इजहार अंसारी आदि के नाम पर कर दिया गया. इस पूरी प्रक्रिया में फर्जी दस्तावेज का सहारा लिया गया. अदालत ने अपने फैसले में कहा कि तेतुलिया मौजा की विवादित भूमि कानूनी रूप से "संरक्षित वन" (Protected Forest) भूमि है. दस्तावेज में यह  "गैर आबाद मालिक जंगल साल" के रूप में दर्ज है.

 

1962 में यह बोकारो स्टील प्लांट (SAIL) को सौंप दिया गया था. हालांकि मालिकाना हक (टाइटल) राज्य सरकार/वन विभाग के पास ही रहा. इतना ही नहीं  केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति के बिना भूमि की प्रकृति बदल कर “पुरानी परती” कर दी गयी.  यह वन संरक्षण अधिनियम का उल्लंघन है. जमीन के अंतिम रिकॉर्ड प्रकाशन के आठ साल से भी अधिक समय बाद 2021 में उमायुष मल्टीकॉम को मुकदमे से जोड़ा गया. 

 

यह छोटानागपुर काश्तकारी (CNT) अधिनियम द्वारा निर्धारित 'तीन महीने' की कानूनी समय-सीमा से अधिक था. इससे सेटलमेंट ऑफिसर का आदेश कानूनी रूप से अमान्य और समय-सीमा द्वारा वर्जित (Barred by limitation) हो गया.

 

उल्लेखनीय है कि तेतुलिया स्थित वनभूमि की खरीद बिक्री के मामले में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा भी पीएमएलए के विशेष न्यायाधीश की अदालत में आरोप पत्र दायर किया जा चुका है. इसमें इजहार अंसारी द्वारा 103 एकड़ जमीन पर दावे के लिए पेश किये गये नीलामी से संबंधित दस्तावेज को फर्जी करार दिया गया है. सीआईडी भी इस जमीन की खरीद बिक्री  मामले की जांच कर रही है.

 

 

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