Bokaro: जिला के गोमिया प्रखंड के जंगली इलाकों में हाथियों का उत्पात थमने का नाम नहीं ले रहा है. गांगपुर और आसपास के गांवों में जंगली हाथियों के बढ़ते हमलों ने ग्रामीणों की नींद उड़ा दी है. स्थिति इतनी भयावह हो गई है कि लोग अपने घरों के भीतर भी सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं और रातें छतों पर गुजारने को मजबूर हैं.
छतों पर कट रही रातें, दहशत में ग्रामीण

पिछले कुछ दिनों से हाथियों के दल ने महुआटांड़, बड़की पुन्नू और लुगुबुरु के तराई वाले क्षेत्रों में भारी तबाही मचाई है. हाथियों द्वारा घरों को क्षतिग्रस्त करने और फसलों को बर्बाद करने की घटनाओं के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश और डर व्याप्त है. कच्चे मकानों में रहने वाले ग्रामीण सबसे ज्यादा असुरक्षित हैं, जिसके कारण कई परिवार अपने बच्चों के साथ पड़ोसियों की पक्की छतों पर शरण ले रहे हैं.
ड्रोन और विशेषज्ञ टीम से निगरानी
हाथियों की लोकेशन ट्रैक करने और उन्हें रिहायशी इलाकों से दूर खदेड़ने के लिए वन विभाग ने आधुनिक तकनीक का सहारा लिया है, घने जंगलों में हाथियों की सटीक स्थिति जानने के लिए ड्रोन कैमरों का उपयोग किया जा रहा है. पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा से विशेषज्ञों की एक टीम बुलाई गई है. वन विभाग ने 5-5 सदस्यों की कई टीमें गठित की हैं, जो पेटरवार के गागा क्षेत्र और अन्य प्रभावित इलाकों में लगातार गश्त कर रही हैं.
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