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झारखंड में तेजी से बढ़ रहा कैंसर, हर वर्ष 35 से 40 हजार बन रहे नए मरीज

विश्व कैंसर दिवस के मौके पर झारखंड में कैंसर की गंभीर स्थिति एक बार फिर सामने आई है. राज्य में कैंसर एक तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्या बन चुका है, लेकिन जागरूकता की कमी, सामाजिक कलंक और भय के कारण अधिकांश मामलों का पता बहुत देर से चल रहा है.
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Ranchi : विश्व कैंसर दिवस के मौके पर झारखंड में कैंसर की गंभीर स्थिति एक बार फिर सामने आई है. राज्य में कैंसर एक तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्या बन चुका है, लेकिन जागरूकता की कमी, सामाजिक कलंक और भय के कारण अधिकांश मामलों का पता बहुत देर से चल रहा है. इसका सीधा असर इलाज की संभावनाओं और मरीजों की जीवन दर पर पड़ रहा है.

 

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, राज्य में बड़ी संख्या में कैंसर मरीज तब अस्पताल पहुंचते हैं, जब बीमारी अंतिम या उन्नत अवस्था में पहुंच चुकी होती है. शुरुआती लक्षणों को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है. डर, गलत जानकारी और सामाजिक वर्जनाओं के कारण लोग समय रहते जांच नहीं कराते.

 

रांची सदर अस्पताल के ऑन्कोलॉजिस्ट डॉक्टर गुंजेश सिंह ने बताया कि कैंसर को लेकर जागरूकता की कमी केवल अशिक्षित वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि पढ़े लिखे लोग भी इससे अछूते नहीं हैं. कई मरीज पहले होम्योपैथिक, आयुर्वेदिक और अन्य अवैज्ञानिक तरीकों से इलाज कराने की कोशिश करते हैं. जब इन प्रयासों से बीमारी ठीक नहीं होती, तब वे आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था तक पहुंचते हैं.


 
तब तक कैंसर काफी आगे बढ़ चुका होता है, जिससे इलाज बेहद कठिन हो जाता है. उन्होंने कहा कि झारखंड में कैंसर को लेकर कई तरह के मिथक प्रचलित हैं और कुछ मरीज सामाजिक बदनामी के डर से बीमारी की पुष्टि के बाद भी इलाज से इनकार कर देते हैं.

 

आंकड़े बताते हैं कि झारखंड में हर साल लगभग 35 हजार से 40 हजार नए कैंसर मरीज सामने आ रहे हैं. प्रति एक लाख आबादी पर करीब 70 लोग कैंसर से प्रभावित हो रहे हैं. मृत्यु दर भी लगभग इसी अनुपात में है, जिसका मुख्य कारण देर से निदान माना जा रहा है.

 

राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज रांची के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉक्टर अजीत कुशवाहा के अनुसार, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के आंकड़ों में झारखंड में गैर संचारी रोग कुल बीमारी बोझ का 48 प्रतिशत हिस्सा बन चुके हैं. 


इनमें कैंसर एक प्रमुख कारण है. उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में सर्जिकल ऑन्कोलॉजी ओपीडी में कुल 3,412 मरीजों की जांच की गई, जिनमें से लगभग 40 प्रतिशत मरीज उन्नत अवस्था में थे.पिछले वर्षों के आंकड़े भी स्थिति की गंभीरता को दर्शाते हैं. वर्ष 2019 में सर्जिकल ऑन्कोलॉजी ओपीडी में लगभग 1,100 मरीज पहुंचे थे. कोविड महामारी के दौरान 2020 और 2021 में नियमित जांच प्रभावित रही, लेकिन इसके बाद मरीजों की संख्या में तेज वृद्धि देखी गई. 

 

वर्ष 2023 में यह संख्या बढ़कर 8,913 तक पहुंच गई, जबकि उसी वर्ष कैंसर से मौतों का आंकड़ा 130 दर्ज किया गया. वर्ष 2024 में भी हजारों मरीज अस्पताल पहुंचे और सौ से अधिक मौतें दर्ज की गईं.स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय पर जांच, नियमित स्क्रीनिंग और सही जानकारी लोगों तक पहुंचे तो कैंसर से होने वाली मौतों में बड़ी कमी लाई जा सकती है. फिलहाल अस्पतालों के आंकड़े यह संकेत दे रहे हैं कि झारखंड में कैंसर एक गंभीर और बढ़ती हुई चुनौती बना हुआ है, जिससे निपटने के लिए व्यापक जागरूकता और समयबद्ध चिकित्सा हस्तक्षेप की जरूरत है.

 

 

 

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