Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला में पति द्वारा पत्नी पर लगाए गए अवैध संबंध, क्रूरता और परित्याग के आरोपों को अप्रमाणित मानते हुए तलाक की मांग खारिज कर दी. अदालत ने परिवार न्यायालय, गोड्डा के फैसले को बरकरार रखा है. कहा कि केवल संदेह और सामान्य आरोपों के आधार पर तलाक का आदेश नहीं दिया जा सकता.
मामले में अपीलकर्ता पति ने परिवार न्यायालय, गोड्डा द्वारा उनकी तलाक याचिका खारिज किए जाने के निर्णय को चुनौती दी थी. हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति अरुण कुमार राय ने मामले में फैसला सुनाया.
ये है कोर्ट का आदेश
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि व्यभिचार (अवैध संबंध) का आरोप गंभीर प्रकृति का होता है, इसलिए इसके लिए ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य आवश्यक हैं. पति ने केवल सामान्य और संदेह आधारित आरोप लगाए, लेकिन किसी प्रत्यक्ष घटना या ठोस प्रमाण का उल्लेख नहीं किया.
कॉल डिटेल्स या अन्य दस्तावेजी साक्ष्य भी प्रस्तुत नहीं किए गए. गवाहों ने भी किसी प्रत्यक्ष अवैध संबंध की पुष्टि नहीं की. अदालत ने स्पष्ट किया कि व्यभिचार जैसे गंभीर आरोपों के लिए उच्च स्तर का प्रमाण अपेक्षित है. कोर्ट ने कहा कि वैवाहिक जीवन में सामान्य मतभेद या झगड़े ‘क्रूरता’ की श्रेणी में नहीं आते. पत्नी के घर छोड़ने की घटना को भी विधिक रूप से परित्याग सिद्ध करने योग्य नहीं पाया गया, क्योंकि आवश्यक कानूनी तत्वों का प्रमाण नहीं दिया गया. हाईकोर्ट ने कहा कि परिवार न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों का समुचित मूल्यांकन किया है और उसके निर्णय में कोई कानूनी त्रुटि या ‘पर्वर्सिटी’ (स्पष्ट असंगति या साक्ष्य के विपरीत निष्कर्ष) नहीं है.
क्या था मामला
दरअसल पति-पत्नी का विवाह 8 दिसंबर 2011 को हिंदू रीति-रिवाज से हुआ था. दंपति के दो बच्चे हैं. पति विकास (बदला हुआ नाम) ने आरोप लगाया कि पत्नी रेखा (बदला हुआ नाम) का एक व्यक्ति के साथ अवैध संबंध था और वह 30 अप्रैल 2021 को बच्चों, आभूषण व नकदी लेकर उसके साथ घर छोड़कर चली गई. पति ने इस आधार पर तलाक की मांग की थी. हाईकोर्ट की खंडपीठ ने पति की अपील खारिज करते हुए परिवार न्यायालय, गोड्डा द्वारा 15 अक्टूबर 2022 को पारित निर्णय को बरकरार रखा है.
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