New Delhi : आज बुधवार को राज्यसभा में CAPF बिल को लेकर भारी हंगामा हुआ. विपक्ष के हंगामे के बीच मोदी सरकार का केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026 राज्यसभा में ध्वनि मत से पारित हो गया.
'जवान विरोधी - मोदी सरकार'
— Congress (@INCIndia) April 1, 2026
मोदी सरकार बहुमत के बल पर CAPF जवानों के अधिकारों को रौंद रही है। ये देश की रक्षा में अपना जीवन न्योछावर करने वाले वीरों के साथ अन्याय है।
सरकार की इस मनमानी के खिलाफ विपक्ष के सांसदों ने राज्यसभा से वॉकआउट किया। हम मोदी सरकार को जवानों का हक छीनने… pic.twitter.com/vTzfPlNytm
जानकारी दी गयी है कि इस बिल का मकसद सभी पांच सीएपीएफ बलों के लिए एक समान नियम बनाना है. इसमें शीर्ष पदों पर आईपीएस अधिकारियों के लिए बड़ा कोटा तय किया गया है.
विपक्ष ने इस बिल को सिलेक्ट कमेटी के पास भेजने की मांग की. यह मांग नहीं माने जाने पर विपक्षी सासंद सदन से वॉकआउट कर गये. विपक्ष ने बिल को आनन-फानन में पास करने का आरोप लगाया है.
CAPF के जो जवान देश की रक्षा करते हैं, मोदी सरकार बहुमत के दम पर उन्हीं के हकों को रौंद रही है।
— Congress (@INCIndia) April 1, 2026
दुख की बात ये है कि इस मामले में जब सिलेक्ट कमेटी बनी तो CAPF के लोगों को अपनी बात रखने का मौका भी नहीं दिया गया।
मोदी सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद अपनी मनमानी करने पर तुली… pic.twitter.com/YKvYG9q2lr
दरअसल अभी तक देश के अलग-अलग अर्धसैनिक बलों के लिए सेवा और प्रशासन के नियम भी अलग-अलग थे. नया बिल एक सिंगल सिस्टम लागू करेगा. विपक्ष के हंगामे का कारण यह है नये कानून के तह, सीएपीएफ में आईजी रैंक के 50 फीसदी पद और एडीजी रैंक के कम से कम 67 फीसदी पद आईपीएस अधिकारियों के लिए रिजर्व रखे गये हैं.
विपक्ष का कहना है कि पिछले साल अक्तूबर में सुप्रीम कोर्ट ने एक रिव्यू पिटीशन खारिज कर दी थी. कहा था कि अर्धसैनिक बलों में आईपीएस अफसरों की संख्या धीरे-धीरे कम की जाये, इससे अर्धसैनिक बलों में बरसों से काम कर रहे कैडर अधिकारियों को प्रमोशन मिल सकेगा. विपक्ष सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सहमति जताते हुए इस बिल का विरोध कर रहा है.
आज सदन में चर्चा का जवाब देते हुए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि यह बिल देश के संघीय ढांचे को कमजोर नहीं, वरन मजबूत करता है. नये कानून से भर्ती प्रक्रिया बेहतर होगी और जवानों का मनोबल उंचा होगा.
हालांकि विपक्ष ने मांग की कि यह बिल संसद की प्रवर समिति के पास भेजा जाना चाहिए. लेकिन सरकार ने उनकी मांग दरकिनार कर दी. इसके बाद नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अगुवाई में पूरा विपक्ष नारेबाजी करते हुए सदन से वॉकआउट कर गया.
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