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पलामू के शिक्षक का दो मैट्रिक प्रमाणपत्र का मामला उजागर, उप-प्रधान ने की शिकायत

Palamu : पलामू जिले के विश्रामपुर प्रखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत लालगढ़ में शिक्षक नियुक्ति को लेकर गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है. लालगढ़ पंचायत के उप-प्रधान कुणाल ओझा ने मध्य विद्यालय लालगढ़ में पदस्थापित शिक्षक विनय कुमार ओझा पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने का आरोप लगाया है.
 

Palamu: पलामू जिले के विश्रामपुर प्रखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत लालगढ़ में शिक्षक नियुक्ति को लेकर गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है. लालगढ़ पंचायत के उप-प्रधान कुणाल ओझा ने मध्य विद्यालय लालगढ़ में पदस्थापित शिक्षक विनय कुमार ओझा पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने का आरोप लगाया है. इस संबंध में उन्होंने जिला अधिकारी, पलामू को लिखित शिकायत सौंपते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है.

 

शिकायत के अनुसार, शिक्षक विनय कुमार ओझा, शिक्षक संख्या 925798, पिता स्वर्गीय सरयू ओझा उर्फ सरजू ओझा ने नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान कथित रूप से दो अलग-अलग जन्म तिथियों के साथ दो बार मैट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण की. 

 

उपलब्ध दस्तावेजों में दर्शाया गया है कि उन्होंने पहली बार वर्ष 1989 में हाई स्कूल लालगढ़ से मैट्रिक पास की, जिसमें जन्म तिथि 29 जनवरी 1973 अंकित है. वहीं  दूसरी बार वर्ष 2003 में दूसरी जन्म तिथि 15 अक्टूबर 1982 के साथ पुनः मैट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण की गई. दोनों प्रमाणपत्रों में तस्वीर एक ही व्यक्ति की बताई जा रही है.

 

उप-मुखिया का आरोप है कि वर्ष 2015-16 की शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान दस्तावेजों का समुचित सत्यापन नहीं किया गया या फिर जानबूझकर नियमों की अनदेखी की गई. इसके साथ ही शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2013 से 2024 तक मेदिनीनगर न्यायालय में लंबित एक आपराधिक मामले की जानकारी नियुक्ति के समय शपथ पत्र में छिपाई गई हो सकती है, जिसकी जांच आवश्यक है.

 

कुणाल ओझा ने इस मामले की प्रतिलिपि राज्यपाल झारखंड, मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, शिक्षा सचिव और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो रांची को भी भेजी है. उन्होंने मांग की है कि शिक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए, नियुक्ति में शामिल अधिकारियों की भूमिका की जांच हो, फर्जी तरीके से प्राप्त वेतन की वसूली की जाए और दोषियों पर कानूनी कार्रवाई की जाए.

 

उप-मुखिया ने कहा कि यह मामला न केवल सरकारी धन के दुरुपयोग से जुड़ा है, बल्कि योग्य अभ्यर्थियों के अधिकारों के साथ भी अन्याय है. उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए.

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