- हाई कोर्ट ने 342 सफल अभ्यर्थियों को प्रतिवादी बनाने का दिया था निर्देश
Ranchi : 11वीं से 13वीं संयुक्त जेपीएससी मेंस परीक्षा के परिणाम को रद्द करने की मांग वाली रिट याचिका को हाईकोर्ट की एकल पीठ द्वारा खारिज किए जाने के आदेश को चुनौती देने वाली अयूब तिर्की एवं अन्य की अपील (एलपीए) पर झारखंड हाईकोर्ट में बुधवार को सुनवाई हुई.
मामले में कोर्ट ने अनुशंसित एवं नियुक्त अभ्यर्थियों को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया. हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक एवं न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई 3 सप्ताह बाद निर्धारित की. प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता कुमार हर्ष ने पक्ष रखा.
पूर्व में कोर्ट ने याचिकाकर्ता के अधिवक्ता को 342 सफल अभ्यर्थियों (जिन्हें नियुक्ति पत्र मिल चुका है) को मामले में प्रतिवादी बनाने का निर्देश दिया था. दरअसल, पूर्व की सुनवाई में खंडपीठ ने इस अपील की सुनवाई के दौरान कहा था कि इस केस के अंतिम निर्णय से सफल अभ्यर्थी प्रभावित होंगे. सुनवाई के दौरान जेपीएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरवाल ने पक्ष रखा.
एकल पीठ ने की थी याचिका खारिज
बता दें कि हाईकोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की एकलपीठ ने अक्टूबर 2025 में 11वीं से 13वीं संयुक्त जेपीएससी मेंस परीक्षा के परिणाम को रद्द करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दी थी. अदालत ने दोनों पक्ष की दलीलें सुनने के बाद स्पष्ट किया था कि याचिकाकर्ता की आपत्तियां समयबद्ध नहीं थीं. मूल्यांकन प्रक्रिया में ऐसा कुछ नहीं पाया गया, जो परीक्षा परिणाम को रद्द करने योग्य हो. अतः याचिका निराधार है और उसे खारिज किया जाता है.
अयूब तिर्की और राजेश कुमार की ओर से दायर रिट याचिका पर सुनवाई के दौरान जेपीएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरवाल ने पक्ष रखते हुए कहा था कि याचिकाकर्ता परीक्षा में असफल हुए हैं, इसी कारण अब वे प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं. अगर उन्हें परीक्षा पद्धति से आपत्ति थी, तो उन्हें पूर्व में ही आपत्ति दर्ज करानी चाहिए थी, न कि परिणाम आने के बाद. सभी उम्मीदवारों के लिए एक समान नियम लागू किए गए थे और किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं हुआ है.
रिट याचिका में कहा गया था जेपीएससी ने डिजिटल इवैल्यूएशन कराया, जो परीक्षा नियमों के खिलाफ है. रीजनल लैंग्वेज की कॉपियों की जांच कम अनुभव वाले परीक्षकों से कराई गई, जबकि नियम के अनुसार कम से कम 10 वर्षों का अनुभव रखने वाले परीक्षकों से जांच कराना आवश्यक था. मूल्यांकन प्रक्रिया में कई गंभीर त्रुटियां और अनियमितताएं थीं, इसलिए परीक्षा परिणाम को रद्द किया जाए.
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